UGC नियमों पर SC की रोक: गिरिराज सिंह बोले- 'सनातन को तोड़ने वाले थे नियम', फिर डिलीट किया ट्वीट, नए पोस्ट में मोदी-शाह का जताया आभार

UGC के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट की रोक के बाद केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह का बयान चर्चा में है। उन्होंने पहले ट्वीट में नियमों को सनातन विरोधी बताया, फिर उसे हटा दिया। दूसरे ट्वीट में गिरिराज सिंह ने पीएम मोदी व अमित शाह का आभार जताया।

Updated On 2026-01-29 18:57:00 IST

UGC के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट की रोक के बाद केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह का बयान चर्चा में है।

Giriraj Singh on UGC Rules: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए समानता नियमों पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा रोक लगाए जाने के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने इस फैसले का स्वागत करते हुए पीएम मोदी, गृह मंत्री और शिक्षा मंत्री का आभार जताया। हालांकि, उन्होंने पहले ट्वीट में नियमों को 'सनातन को तोड़ने वाला' करार दिया था, जिसे बाद में हटा दिया।

पहले ट्वीट किया, फिर हटाया

गिरिराज सिंह ने सबसे पहले सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा कर सुप्रीम कोर्ट के आदेश का समर्थन किया। इस पोस्ट में उन्होंने लिखा कि UGC के नियम सनातन परंपरा को विभाजित करने वाले हैं और शीर्ष अदालत का हस्तक्षेप जरूरी था। हालांकि, कुछ ही देर बाद उन्होंने यह पोस्ट डिलीट कर दिया, जिसके बाद मामला और चर्चा में आ गया।


नए पोस्ट में मोदी और शाह का आभार

ट्वीट हटाने के बाद गिरिराज सिंह ने एक नया पोस्ट साझा किया, जिसमें उन्होंने सीधे तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की रोक से देश के छात्रों, शिक्षकों और शैक्षणिक संस्थानों को राहत मिली है और यह फैसला एकता, संतुलन व संवैधानिक मूल्यों की रक्षा करता है।


क्या थे UGC के नए नियम?

UGC ने हाल ही में उच्च शिक्षण संस्थानों में एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग के छात्रों के साथ भेदभाव रोकने के उद्देश्य से नए नियम अधिसूचित किए थे। इसके तहत विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में इक्विटी कमिटी गठित करने और जातिगत भेदभाव की शिकायतों पर कार्रवाई का प्रावधान किया गया था।

विरोध के बाद मामला पहुंचा सुप्रीम कोर्ट

नए नियम लागू होने के बाद सवर्ण संगठनों और कुछ सामाजिक समूहों ने आशंका जताई कि इन प्रावधानों का गलत इस्तेमाल हो सकता है। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई। सुनवाई के दौरान अदालत ने नियमों को अस्पष्ट और दुरुपयोग योग्य मानते हुए उन पर रोक लगा दी और केंद्र सरकार को समीक्षा के लिए कमिटी बनाने का निर्देश दिया।

अदालत की सख्त टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि समय रहते हस्तक्षेप नहीं किया गया, तो ऐसे नियम भविष्य में समाज को बांटने का कारण बन सकते हैं। फिलहाल, नए नियमों को रोकते हुए पुराने प्रावधानों को लागू रखने का आदेश दिया गया है।

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