रिजॉर्ट पॉलिटिक्स' इज बैक: शिंदे गुट ने 29 पार्षदों को भेजा फाइव स्टार होटल, उद्धव गुट से बचाने की कवायद

बीएमसी चुनाव नतीजों के बाद मुंबई में 'रिजॉर्ट पॉलिटिक्स' की वापसी हुई है। शिंदे सेना ने अपने 29 पार्षदों को 'हॉर्स ट्रेडिंग' के डर से बांद्रा के ताज लैंड्स एंड होटल में शिफ्ट कर दिया है।

Updated On 2026-01-17 21:34:00 IST

शिंदे गुट के 29 पार्षद भाजपा के लिए किंगमेकर की भूमिका में हैं। 

मुंबई :​ मुंबई महानगरपालिका के चुनाव नतीजों के बाद महाराष्ट्र की राजनीति एक बार फिर होटलों और रिजॉर्ट्स तक पहुँच गई है। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने अपने सभी 29 नवनिर्वाचित पार्षदों को एकजुट रखने के लिए उन्हें मुंबई के बांद्रा स्थित आलीशान फाइव स्टार होटल 'ताज लैंड्स एंड' में शिफ्ट कर दिया है।

यह कदम शनिवार दोपहर को उठाया गया, जब सत्ता बनाने के लिए जोड़-तोड़ की खबरें तेज होने लगीं। शिंदे गुट की इस कार्रवाई ने स्पष्ट कर दिया है कि बीएमसी की सत्ता के इस 'महामुकाबले' में कोई भी दल जोखिम लेने को तैयार नहीं है।

​बांद्रा के फाइव स्टार होटल में पार्षदों की 'किलाबंदी'

​मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने अपने सभी विजयी पार्षदों को निर्देश दिया कि वे शनिवार दोपहर 3 बजे तक ताज लैंड्स एंड होटल पहुँचें। पार्टी सूत्रों के अनुसार, इन पार्षदों को अगले कम से कम तीन दिनों तक इसी होटल में कड़ी निगरानी में रखा जाएगा।

होटल के भीतर और बाहर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं और पार्षदों को सख्त हिदायत दी गई है कि वे पार्टी नेतृत्व की अनुमति के बिना किसी भी बाहरी व्यक्ति, मीडिया या विपक्षी दल के नेताओं से संपर्क न करें।

यह 'किलाबंदी' इसलिए की गई है ताकि विपक्षी खेमा किसी भी तरह की सेंधमारी न कर सके।

​'हॉर्स ट्रेडिंग' का डर और मेयर चुनाव की चुनौती

​बीएमसी के नतीजों में किसी भी एक दल को स्पष्ट बहुमत न मिलने के कारण निर्दलीय और छोटे दलों के पार्षदों के साथ-साथ बड़े दलों के पार्षदों पर भी 'हॉर्स ट्रेडिंग' का खतरा मंडरा रहा है।

शिंदे सेना को सबसे अधिक डर उद्धव ठाकरे गुट से लग रहा है, जो अपने पुराने साथियों को वापस लाने की कोशिश कर सकते हैं।

मेयर पद के चुनाव के लिए आवश्यक जादुई आंकड़े तक पहुँचने के लिए एक-एक पार्षद की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है, इसीलिए शिंदे गुट ने अपने 29 पार्षदों को सुरक्षित कवच में रखने का फैसला किया है।

​महायुति गठबंधन और सत्ता का नया समीकरण

​इस बार के बीएमसी चुनाव में भाजपा और शिंदे सेना का 'महायुति' गठबंधन सबसे बड़े समूह के रूप में उभरा है, लेकिन बहुमत के लिए उन्हें अभी भी कुछ अन्य सहयोगियों की आवश्यकता है।

शिंदे गुट के 29 पार्षद भाजपा के लिए किंगमेकर की भूमिका में हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शिंदे सेना अपने पार्षदों को होटल में रखकर न केवल विपक्ष से बचा रही है, बल्कि गठबंधन के भीतर अपनी मोलभाव की शक्ति को भी मजबूत कर रही है।

जब तक मेयर और डिप्टी मेयर के नामों पर अंतिम मुहर नहीं लग जाती, तब तक इन पार्षदों का होटल में रहना लगभग तय माना जा रहा है।

​विपक्ष का तीखा प्रहार: "लोकतंत्र का अपमान और डर की राजनीति"

​शिंदे गुट की इस रिजॉर्ट पॉलिटिक्स पर शिवसेना ( उद्धव ठाकरे गुट) , कांग्रेस और एनसीपी (शरद पवार गुट) ने जोरदार हमला बोला है। उद्धव ठाकरे गुट के नेताओं ने तंज कसते हुए कहा कि जो लोग खुद को 'असली शिवसेना' कहते हैं, उन्हें अपने ही पार्षदों के बिकने का डर सता रहा है।

विपक्ष का आरोप है कि यह कदम लोकतंत्र की गरिमा के खिलाफ है और यह दर्शाता है कि शिंदे गुट के पार्षदों का अपनी ही पार्टी के नेतृत्व पर भरोसा नहीं है।

कांग्रेस ने इसे 'बंधक राजनीति' करार देते हुए कहा कि जनता ने विकास के लिए वोट दिया था, न कि पार्षदों को फाइव स्टार होटलों में बंद देखने के लिए।

​महाराष्ट्र की राजनीति में रिजॉर्ट कल्चर का इतिहास

​महाराष्ट्र के लिए यह नजारा नया नहीं है। साल 2019 के विधानसभा चुनाव के बाद जब महाविकास अघाड़ी की सरकार बन रही थी, तब भी शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस के विधायकों को इसी तरह होटलों में रखा गया था।

इसके बाद 2022 में जब एकनाथ शिंदे ने बगावत की थी, तब भी विधायकों को सूरत, गुवाहाटी और फिर गोवा के रिजॉर्ट्स में ले जाया गया था। अब वही 'रिजॉर्ट कल्चर' स्थानीय निकाय यानी बीएमसी के स्तर पर भी देखने को मिल रहा है, जो बताता है कि देश की सबसे अमीर नगर निगम की कुर्सी कितनी अहम है।

​प्रशासन और पुलिस की पैनी नजर

​मुंबई की इस बदली हुई सियासी स्थिति को देखते हुए पुलिस प्रशासन भी अलर्ट पर है। उन होटलों के बाहर सुरक्षा बढ़ा दी गई है जहाँ विभिन्न दलों के पार्षदों के रुकने की संभावना है।

राज्य खुफिया विभाग भी राजनीतिक गतिविधियों और संभावित दलबदल की कोशिशों पर नजर रख रहा है। सूत्रों का कहना है कि न केवल शिंदे सेना, बल्कि कुछ अन्य छोटे दल भी अपने पार्षदों को गुप्त स्थानों पर भेजने की तैयारी कर रहे हैं ताकि मेयर चुनाव के दिन ही उन्हें सीधे सदन में लाया जा सके।

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