97 मिनट के भाषण में विपक्ष की घेराबंदी: पीएम मोदी बोले— 'जो अपना पॉलिटिकल स्टार्टअप नहीं बचा पाए, वो मोदी की कब्र क्या खोदेंगे'
प्रधानमंत्री मोदी ने राज्यसभा में 97 मिनट के भाषण के जरिए यह संदेश दिया कि उनकी सरकार 2047 के लक्ष्य को लेकर अडिग है।
पीएम मोदी ने देश के सामने 2047 तक भारत को एक 'विकसित राष्ट्र' बनाने का संकल्प दोहराया।
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्यसभा में दिए अपने भाषण से आगामी वर्षों की राजनीतिक और विकासपरक दिशा तय कर दी है। सदन में विपक्ष के शोर-शराबे और वॉकआउट के बावजूद पीएम ने धैर्यपूर्वक अपनी बात रखी।
उनके इस भाषण को महज एक जवाब नहीं, बल्कि 2047 के विजन और वैश्विक स्तर पर भारत की बढ़ती धमक के घोषणापत्र के रूप में देखा जा रहा है।
विपक्ष को दिखाया आईना: 'नकारात्मकता से ऊपर उठें'
प्रधानमंत्री ने अपने भाषण का एक बड़ा हिस्सा विपक्ष की आलोचना पर केंद्रित रखा। उन्होंने विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि वे विकास के बजाय नकारात्मकता फैलाने में जुटे हैं।
पीएम ने तंज कसते हुए कहा कि विपक्ष जितना कीचड़ उछालेगा, 'कमल' उतना ही खिलेगा। उन्होंने कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दलों को पुरानी विफलताओं की याद दिलाई और कहा कि जनता ने अब उन्हें उनकी सही जगह दिखा दी है। भ्रष्टाचार और तुष्टीकरण की राजनीति पर भी पीएम ने कड़ा प्रहार किया।
2047 का ब्लूप्रिंट: विकसित भारत की आधारशिला
पीएम मोदी ने देश के सामने 2047 तक भारत को एक 'विकसित राष्ट्र' बनाने का संकल्प दोहराया। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार केवल तत्कालीन समस्याओं का समाधान नहीं कर रही, बल्कि आने वाली सदियों की बुनियाद रख रही है।
उन्होंने डिजिटल इंडिया, इंफ्रास्ट्रक्चर में क्रांति और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में हो रहे कार्यों को इस ब्लूप्रिंट का मुख्य हिस्सा बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि अगले कुछ साल देश के लिए 'गेम चेंजर' साबित होंगे।
वैश्विक नेतृत्व और भारत की बढ़ती साख
भाषण के दौरान प्रधानमंत्री ने दुनिया में भारत की बदलती छवि और वैश्विक नेतृत्व की भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आज भारत किसी के दबाव में नहीं आता, बल्कि वैश्विक एजेंडा तय करता है।
'विश्वबंधु' के रूप में भारत की भूमिका, जी-20 की सफलता और संकट के समय दूसरे देशों की मदद करने की क्षमता ने भारत को दुनिया की 'तीसरी सबसे बड़ी शक्ति' बनने की ओर अग्रसर किया है।
पीएम ने विश्वास दिलाया कि जल्द ही भारत दुनिया की शीर्ष तीन अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होगा।
युवा, महिला और गरीब: तीन प्रमुख स्तंभ
पीएम ने अपने भाषण में अपनी सरकार के मूल मंत्र 'सबका साथ, सबका विकास' को परिभाषित करते हुए चार प्रमुख वर्गों—युवा, महिला, गरीब और किसान पर फोकस किया।
उन्होंने कहा कि लखपति दीदी योजना, पीएम आवास और किसानों के सम्मान निधि जैसी योजनाओं ने करोड़ों लोगों का जीवन बदला है। उन्होंने विपक्ष को चुनौती दी कि वे इन आंकड़ों और जमीनी बदलावों को झुठला नहीं सकते।
140 करोड़ भारतीयों का 'सुरक्षा कवच' और विपक्ष की निराशा
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में अपनी सरकार की 12 साल की उपलब्धियों का विस्तार से ब्यौरा दिया। उन्होंने कहा कि इन उपलब्धियों की चमक ने विपक्ष को निराशा के अंधेरे में धकेल दिया है।
पीएम ने जोर देकर कहा कि उनके पास देश के 140 करोड़ लोगों का अटूट 'सुरक्षा कवच' है और विपक्ष झूठे आरोप लगाकर उनकी छवि को नुकसान नहीं पहुंचा सकता।
नए वर्ल्ड ऑर्डर में भारत का नेतृत्व और 'रिफॉर्म एक्सप्रेस'
पीएम ने वैश्विक मंच पर भारत की बदलती स्थिति को स्पष्ट करते हुए कहा कि अब भारत 'बस पकड़ने' वाला देश नहीं रहा, बल्कि वह पूरे काफिले का नेतृत्व करने वाला देश बन चुका है। उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया अब एक नए वर्ल्ड ऑर्डर की तरफ बढ़ रही है और सबका झुकाव भारत की ओर है।
पॉलिटिकल स्टार्टअप' और गांधी परिवार पर तीखा हमला
विपक्ष द्वारा 'मोदी की कब्र' खोदने के नारों पर पलटवार करते हुए पीएम ने कहा कि अगर विपक्ष ऐसी बातें करेगा, तो वे भी कांग्रेस और विपक्ष के काले कारनामों को खोद-खोद कर बाहर निकालेंगे।
उन्होंने कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा कि वे स्टार्टअप कल्चर को तो बढ़ावा नहीं दे पाए, यहाँ तक कि अपने परिवार के 'पॉलिटिकल स्टार्टअप' को भी सफल नहीं बना सके।
इसके साथ ही पीएम ने गांधी परिवार पर महात्मा गांधी का 'सरनेम चुराने' का बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि देश की जनता अब सब समझ चुकी है।
सिखों का अपमान, बंगाल का हस्तक्षेप और कश्मीर की नई तस्वीर
प्रधानमंत्री ने राहुल गांधी का नाम लिए बिना उन पर सिखों के अपमान का आरोप लगाया और कहा कि कांग्रेस के मन में सिखों और गुरुओं के प्रति नफरत भरी पड़ी है।
उन्होंने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई में शामिल होने पर भी निशाना साधा और कहा कि आदिवासियों का हक छीनने वाले घुसपैठियों को बचाने के लिए अदालतों पर दबाव बनाया जा रहा है।