मणिपुर में नई सरकार का रास्ता साफ: बीजेपी ने खेमचंद सिंह को चुना विधायक दल नेता, 4 फरवरी को शपथ संभव
Manipur New Government: राष्ट्रपति शासन हटाने की प्रक्रिया तेज, बीजेपी ने युमनाम खेमचंद सिंह को विधायक दल नेता चुना। जानिए सरकार गठन का पूरा सियासी गणित।
मणिपुर में सरकार गठन की प्रक्रिया तेज, बीजेपी ने युमनाम खेमचंद सिंह को विधायक दल नेता चुना।
Manipur CM News: मणिपुर में राष्ट्रपति शासन हटाने और नई सरकार बनाने की प्रक्रिया तेज हो गई है। इसी बीच भारतीय जनता पार्टी ने विधायक दल के नेता के चुनाव के लिए राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुग को पर्यवेक्षक नियुक्त किया था। इस सिलसिले में बीजेपी विधायक दल की अहम बैठक मंगलवार को दिल्ली में आयोजित की गई।
खेमचंद सिंह चुने गए विधायक दल नेता
दिल्ली में हुई बैठक के बाद युमनाम खेमचंद सिंह को सर्वसम्मति से बीजेपी विधायक दल का नेता चुन लिया गया। इस मौके पर पार्टी पर्यवेक्षक तरुण चुग और अन्य वरिष्ठ नेताओं ने उन्हें बधाई दी और मिठाई खिलाकर शुभकामनाएं दीं। उनके चयन के साथ ही मणिपुर में नई सरकार के गठन का रास्ता लगभग साफ हो गया है।
4 फरवरी को शपथ ग्रहण की संभावना
रिपोर्ट्स के अनुसार, विधायक दल नेता के चुनाव के बाद अब 4 फरवरी को मणिपुर में नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया जा सकता है। खेमचंद सिंह के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के साथ ही राज्य में लंबे समय से जारी राष्ट्रपति शासन समाप्त हो जाएगा।
राष्ट्रपति से मुलाकात कर सकते हैं विधायक
खेमचंद सिंह के चयन के बाद यह संभावना भी जताई जा रही है कि मणिपुर के सभी विधायक राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात के लिए राष्ट्रपति भवन जा सकते हैं। इसके बाद सरकार गठन की औपचारिक प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
मुख्यमंत्री पद की दौड़ में थे कई दावेदार
मुख्यमंत्री पद की रेस में गोविंद दास और टी विश्वजीत सिंह के नाम सबसे आगे माने जा रहे थे। गोविंद दास सात बार के विधायक हैं और उन्हें पूर्व मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह का समर्थन भी प्राप्त बताया जा रहा था। हालांकि अंतिम फैसला खेमचंद सिंह के पक्ष में गया।
इंफाल के बजाय दिल्ली में क्यों हुई बैठक?
पहले बीजेपी विधायक दल की बैठक इंफाल में प्रस्तावित थी, लेकिन कुकी समुदाय से जुड़े पार्टी विधायकों ने केंद्रीय नेतृत्व के साथ दिल्ली में बैठक करने की इच्छा जताई थी। इसी वजह से बैठक का स्थान बदला गया।
मैतेई-कुकी हिंसा के बाद लगा था राष्ट्रपति शासन
मणिपुर में मई 2023 में मैतेई और कुकी समुदायों के बीच भीषण जातीय हिंसा हुई थी, जिसमें 260 से अधिक लोगों की जान गई और हजारों लोग बेघर हो गए। हालात बिगड़ने के बाद 13 फरवरी 2025 को तत्कालीन मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने इस्तीफा दे दिया था, जिसके बाद राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया गया।
विधानसभा में बीजेपी-एनडीए का मजबूत गणित
60 सदस्यीय मणिपुर विधानसभा में बीजेपी के पास 37 विधायक हैं। एनडीए के सहयोगी दलों में नेशनल पीपुल्स पार्टी (NPP) के 6 और नागा पीपुल्स फ्रंट (NPF) के 5 विधायक शामिल हैं। राष्ट्रपति शासन पहले फरवरी 2025 में छह महीने के लिए लगाया गया था, जिसे अगस्त 2025 में आगे बढ़ा दिया गया था।