सोमनाथ स्वाभिमान पर्व: विनाशकों का अंत हुआ, सत्य अविनाशी है' - पीएम मोदी का हुंकार

प्रधानमंत्री मोदी ने सोमनाथ स्वाभिमान पर्व पर गजनी और औरंगजेब जैसे आक्रांताओं के अंत और सोमनाथ की अमरता का संदेश दिया।

Updated On 2026-01-11 16:06:00 IST

प्रधानमंत्री ने श्री सोमनाथ ट्रस्ट के अध्यक्ष के रूप में परिसर में आधुनिक बुनियादी ढांचे और नई यात्री सुविधाओं की समीक्षा भी की।

नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को गुजरात के सोमनाथ में आयोजित 'सोमनाथ स्वाभिमान पर्व' को संबोधित करते हुए इसे भारत के आत्म-सम्मान की पुनरावृत्ति बताया।


यह पर्व सन् 1026 में महमूद गजनी द्वारा मंदिर पर किए गए पहले बड़े हमले के 1000 वर्ष पूरे होने और 1951 में हुए मंदिर के पुनरुद्धार के 75 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में मनाया जा रहा है। पीएम मोदी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सोमनाथ का इतिहास विनाश का नहीं, बल्कि बार-बार उठ खड़े होने और विजय का इतिहास है।

हमलावर इतिहास के पन्नों में दफन, सोमनाथ का शिखर आज भी ऊंचा

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कड़ा संदेश देते हुए कहा कि महमूद गजनी से लेकर औरंगजेब तक, जिन आक्रांताओं ने सोमनाथ को मिटाने की कोशिश की, वे आज इतिहास के धूल भरे पन्नों में दब गए हैं। मोदी ने कहा, "आतंक और कट्टरपंथ कुछ समय के लिए विनाश तो कर सकते हैं, लेकिन वे आस्था और सृजन को कभी हरा नहीं सकते।

आज उन हमलावरों का नाम लेने वाला कोई नहीं है, लेकिन सोमनाथ की ध्वजा आज भी अरब सागर के किनारे शान से लहरा रही है।"

शौर्य यात्रा और 108 घोड़ों का विजय उद्घोष

पर्व के अंतिम दिन प्रधानमंत्री ने 'शौर्य यात्रा' का नेतृत्व किया। यह यात्रा उन वीर योद्धाओं के सम्मान में निकाली गई जिन्होंने 1000 साल पहले गजनी की विशाल सेना का मुकाबला किया था।

108 घोड़ों के साथ निकली इस भव्य शौर्य यात्रा में हजारों श्रद्धालु शामिल हुए। पीएम ने कहा कि यह यात्रा उन गुमनाम शहीदों को एक श्रद्धांजलि है जिन्होंने अपनी संस्कृति को बचाने के लिए गर्दन तो कटा दी, लेकिन झुकाई नहीं।

इतिहास की कड़वी यादें और पटेल का संकल्प

पीएम मोदी ने इतिहास को याद दिलाते हुए कहा कि आजादी के बाद भी कुछ लोग 'गुलामी की मानसिकता' के कारण सोमनाथ के पुनर्निर्माण के खिलाफ थे। उन्होंने लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल, के.एम. मुंशी और डॉ. राजेंद्र प्रसाद का आभार व्यक्त किया, जिनके दृढ़ निश्चय से 1951 में मंदिर का वैभव वापस लौटा।

उन्होंने 2001 की अपनी यादें साझा करते हुए बताया कि कैसे अटल बिहारी वाजपेयी के साथ उन्होंने मंदिर के जीर्णोद्धार के 50 साल पूरे होने का उत्सव मनाया था।

3000 ड्रोन्स का 'शिव-शक्ति' अवतार और डिजिटल भव्यता

इस आयोजन में भारत का अब तक का सबसे बड़ा ड्रोन शो हुआ। 3000 से अधिक ड्रोन्स ने आसमान में 1000 साल के इतिहास की गाथा लिखी। 72 घंटे के 'अखंड ओंकार नाद' और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच सोमनाथ का पूरा परिसर 'शिवमय' हो गया।

प्रधानमंत्री ने श्री सोमनाथ ट्रस्ट के अध्यक्ष के रूप में परिसर में आधुनिक बुनियादी ढांचे और नई यात्री सुविधाओं की समीक्षा भी की।

'विकसित भारत' के लिए सोमनाथ से प्रेरणा

संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री ने कहा कि सोमनाथ वह दीपस्तंभ है जो हमें सिखाता है कि हम चाहे कितनी भी बड़ी मुश्किल में क्यों न हों, यदि हमारी आस्था अटल है, तो हम फिर से उठ खड़े होंगे। उन्होंने आह्वान किया कि जैसे सोमनाथ ने 1000 साल के संघर्ष के बाद विजय प्राप्त की, वैसे ही भारत भी 2047 तक 'विकसित भारत' के अपने लक्ष्य को प्राप्त करेगा।




 




 


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