Share Market Today: दिन के उच्च स्तर से 550 अंक टूटा सेंसेक्स, निफ्टी 25,750 के स्तर के नीचे
Share Market Today: भारतीय शेयर बाजार मंगलवार को शुरुआती बढ़त के बाद दबाव में आ गया। ऊपरी स्तरों पर मुनाफावसूली और विदेशी निवेशकों की बिकवाली के चलते सेंसेक्स दिन के उच्च स्तर से करीब 550 अंक फिसल गया, जबकि निफ्टी 25,750 के नीचे आ गया। जानिए बाजार की कमजोरी के पीछे क्या रहे प्रमुख कारण।
भारतीय शेयर बाजार मंगलवार, 13 जनवरी को शुरुआती बढ़त के बाद दबाव में कारोबार कर रहा है।
Share Market Today: भारतीय शेयर बाजार ने मंगलवार को यह स्पष्ट कर दिया कि कल की तेजी ने मजबूती से अभी पैर नहीं जमाए हैं। कारोबार की शुरुआत में सेंसेक्स और निफ्टी में अच्छी बढ़त देखने को मिली, लेकिन जैसे-जैसे दिन आगे बढ़ा, मुनाफावसूली और विदेशी निवेशकों की बिकवाली के दबाव में बाजार अपनी ऊंचाई से नीचे आ गया। सेंसेक्स दिन के उच्च स्तर से करीब 550 अंकों की गिरावट के साथ फिसल गया, जबकि निफ्टी भी 25,750 के अहम स्तर के नीचे आ गया। यह स्थिति बताती है कि निवेशक फिलहाल जोखिम लेने के मूड में नहीं हैं और ऊपरी स्तरों पर मुनाफा सुरक्षित करना ज्यादा पसंद कर रहे हैं। सुबह के सत्र में बाजार में सकारात्मक माहौल दिखा था। सेंसेक्स ने मजबूती के साथ बढ़ता दिखाई दिया और निफ्टी भी तेजी के साथ आगे बढ़ा। इसका एक कारण यह था कि पिछले कारोबारी दिन बाजार ने लगातार पांच दिन की गिरावट के बाद राहत की सांस ली थी। इसके अलावा भारत और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ताओं को लेकर सकारात्मक संकेतों ने भी शुरुआती उत्साह को सहारा दिया।
निवेशकों को उम्मीद थी कि दोनों देशों के बीच बातचीत से आगे चलकर व्यापार और निवेश से जुड़े मुद्दों में सुधार देखने को मिल सकता है। हालांकि यह तेजी ज्यादा देर टिक नहीं पाई। जैसे ही सूचकांक ऊपर पहुंचे, निवेशकों ने मुनाफावसूली शुरू कर दी। खासतौर पर ऑटो, आईटी और फार्मा सेक्टर के शेयरों में तेज बिकलवाली देखने को मिली। बड़े और भरोसेमंद माने जाने वाले कुछ शेयरों में कमजोरी आने से बाजार की धारणा पर असर पड़ा। इसके साथ ही विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार बिकवाली ने भी बाजार पर दबाव बनाए रखा। विदेशी पूंजी का बाहर जाना आम तौर पर घरेलू बाजार के लिए नकारात्मक संकेत माना जाता है, क्योंकि इससे मांग घटती है और अस्थिरता बढ़ती है। बाजार की गिरावट के पीछे वैश्विक कारक भी अहम रहे। अंतरराष्ट्रीय बाजारों से मिले कमजोर संकेतों ने निवेशकों को सतर्क किया। इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी और रुपए की कमजोरी ने भी चिंता बढ़ाई।
कच्चा तेल महंगा होने से आयात लागत बढ़ने और महंगाई पर दबाव आने की आशंका रहती है, जबकि कमजोर रुपया विदेशी निवेशकों के रुख को और सतर्क बना सकता है। इन सभी कारकों ने मिलकर बाजार की शुरुआती तेजी को फीका कर दिया। यह भी ध्यान देने वाली बात है कि हाल की गिरावट के बाद बाजार में जो उछाल आया था, वह काफी हद तक शॉर्ट कवरिंग और तात्कालिक उम्मीदों पर आधारित था। जैसे ही निवेशकों को लगा कि ऊपरी स्तरों पर जोखिम बढ़ रहा है, उन्होंने मुनाफा निकालना बेहतर समझा। इसका नतीजा यह हुआ कि सेंसेक्स और निफ्टी दोनों अपने दिन के उच्च स्तर से नीचे आ गए। कुल मिलाकर, यह स्थिति बताती है कि बाजार अभी भी नाजुक संतुलन में है। न तो निवेशकों में पूरी तरह भरोसा लौटा है और न ही घबराहट का माहौल है। ऐसे समय में बाजार का फिसलना यह संकेत देता है कि आगे की चाल वैश्विक संकेतों, विदेशी निवेशकों के रुख और आर्थिक घटनाक्रमों पर निर्भर करेगी। निवेशकों के लिए यह दौर धैर्य और सतर्कता का है, जहां जल्दबाजी के बजाय सोच-समझकर फैसले लेना ज्यादा अहम माना जा रहा है।
(एपी सिंह की रिपोर्ट)