एक KYC अपडेट, कई अकाउंट: बिना झंझट सब कुछ ठीक करने का सही तरीका क्या है जान लें
KYC update Tips: भारत में केवायसी एक सिस्टम नहीं है, कई डेटाबेस का नेटवर्क है। गलत क्रम में KYC अपडेट करने से अकाउंट फ्रीज और ट्रांजैक्शन अटक सकते।
गलत क्रम में KYC अपडेट करने से अकाउंट फ्रीज और ट्रांजैक्शन अटक सकते हैं।
KYC update Tips: अगर आपने कभी मोबाइल नंबर बदला हो, नया पता अपडेट कराया हो या सिग्नेचर बदला हो और उसके बाद ओटीपी न आए, म्यूचुअल फंड रिडेम्पशन अटक जाए या पॉलिसी केवायसी पेंडिंग दिखाने लगे, तो आप यह बात अच्छे से जानते हैं कि भारत में केवायसी एक सिस्टम नहीं, बल्कि कई सिस्टम्स का जाल है।
बैंक, म्यूचुअल फंड, बीमा कंपनियां, ब्रोकर्स और केवायसी रजिस्ट्रेशन एजेंसियां- सब आपके डेटा पर निर्भर हैं लेकिन ये सभी आपस में रियल-टाइम में पूरी तरह सिंक नहीं होते। यही वजह है कि केवायसी अपडेट करने का क्रम बेहद अहम हो जाता है। गलत क्रम में अपडेट किया तो हफ्तों तक अकाउंट फ्रीज रह सकता। सही क्रम में किया तो ज्यादातर काम बिना परेशानी के हो जाता।
सबसे पहले: अपना मुख्य बैंक अकाउंट अपडेट करें
आपका प्राइमरी बैंक अकाउंट पूरे फाइनेंशियल सिस्टम की नींव है। यही अकाउंट आधार, पैन, UPI, निवेश और इंश्योरेंस प्रीमियम से जुड़ा होता। ओटीपी भी यहीं से आते हैं। अगर यहां मोबाइल नंबर या पता गलत है, तो आगे का हर अपडेट मुश्किल हो जाएगा। बैंक ब्रांच या नेट बैंकिंग के जरिए KYC अपडेट करें। बदलाव पूरा होने और नए नंबर पर ओटीपी आने तक इंतजार करें। इसमें आमतौर पर 1 से 3 कार्यदिवस लगते हैं।
इसके बाद आप अपने आधार और पैन से जुड़े रिकॉर्ड ठीक करें। नाम, पता या मोबाइल नंबर बदला है तो आधार अपडेट करना अगला जरूरी कदम है। कई संस्थाएं बैकग्राउंड में आधार-आधारित ई-केवायसी करती हैं। अगर आधार में पुराना डेटा है, तो नया अपडेट रिजेक्ट या ओवरराइट हो सकता।
पैन में पता या मोबाइल नंबर उतना अहम नहीं, लेकिन नाम और जन्मतिथि सभी जगह एक जैसी होनी चाहिए। नाम बदलने वालों के लिए यह स्टेप बेहद जरूरी है।
सबसे अहम कदम: सेंट्रल केवायसी अपडेट करें
यहीं पर सबसे ज्यादा लोग गलती करते हैं। सेंट्रल केवायसी वही डेटाबेस है जिससे म्यूचुअल फंड, बीमा कंपनियां, ब्रोकर्स और एनबीएफसी डेटा उठाते हैं। अगर सेंट्रल केवायसी में पुराना डेटा है, तो नई डिटेल देने के बावजूद सिस्टम बार-बार वही पुराना रिकॉर्ड खींच लेता है। सेंट्रल केवायसी किसी भी बैंक, म्यूचुअल फंड हाउस या ब्रोकर्स के जरिए अपडेट कराया जा सकता है। अपडेट के बाद सभी लिंक्ड संस्थाएं नया डेटा ले सकती हैं। हालांकि इसमें कुछ दिन लग सकते हैं। जब बैंक और सीकेवायसी दोनों साफ हो जाएं, तब डिमैट और ट्रेडिंग अकाउंट अपडेट करें। इसके बाद म्यूचुअल फंड प्लेटफॉर्म, AMC और निवेश ऐप्स पर जाएं।
अगर सेंट्रल केवायसी सही है, तो कई जगह डेटा अपने आप अपडेट हो जाता है या बस कन्फर्मेशन मांगा जाता है। सबसे आखिर में में आपको इंश्योरेंस में सुधार करना होगा। बीमा कंपनियों में अपडेट सबसे धीमा होता है। लेकिन जब बैंक और CKYC ठीक हों, तो प्रीमियम या क्लेम आमतौर पर नहीं अटकते। फिर भी पॉलिसी या क्लेम के समय दिक्कत से बचने के लिए अंत में इन्हें भी अपडेट करें।
क्रम क्यों जरूरी है?
फाइनेंशियल सिस्टम एक पिरामिड जैसा होता है, नींव में बैंक और आधार, बीच में सेंट्रल केवायसी और ऊपर निवेश व बीमा प्लेटफॉर्म। ऊपर से शुरू करेंगे तो नीचे का पुराना डेटा सब कुछ बिगाड़ देगा। साफ है कि परेशानी से बचना है तो पहले जड़ ठीक करें, फिर शाखाएं अपने आप ठीक हो जाएंगी।
(प्रियंका कुमारी)