Union Budget 2026: टैरिफ के झटके से उबरने के लिए एमएसएमई सेक्टर को बजट से विशेष मदद की दरकार
केंद्रीय बजट 2026 से एमएसएमई सेक्टर को बड़ी राहत की उम्मीद है। ट्रंप दौर के अमेरिकी टैरिफ से प्रभावित छोटे और मध्यम उद्यमों के लिए सरकार से सस्ते कर्ज, तकनीकी सहायता और नए निर्यात अवसरों की मांग तेज हो गई है। बजट 2026 भारत के एमएसएमई भविष्य की दिशा तय कर सकता है।
केंद्रीय बजट 2026 से एमएसएमई सेक्टर को बड़ी राहत की उम्मीद है।
Union Budget 2026: केंद्रीय बजट 2026 ऐसे समय में आने वाला है, जब भारत का सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र गंभीर वैश्विक चुनौतियों का सामना कर रहा है। यह वह क्षेत्र है जो देश के निर्यात का लगभग आधा हिस्सा संभालता है और सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में करीब 30 प्रतिशत का योगदान देता है। हाल के सालों में अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दौर में लगाए गए कड़े आयात शुल्कों (टैरिफ) ने वैश्विक व्यापार को झकझोर दिया है, जिसका सीधा और गहरा असर भारत के एमएसएमई पर देखने को मिला है। ऐसे में बजट 2026 से यह अपेक्षा की जा रही है कि वह इस क्षेत्र के लिए एक शॉक एब्जॉर्बर यानी झटकों को सहने वाला मजबूत सुरक्षा कवच तैयार करे।
वर्ष 2025 को वैश्विक व्यापार के लिए एक निर्णायक मोड़ के रूप में देखा जा रहा है। अमेरिका द्वारा लगाए गए ऊंचे आयात शुल्कों ने अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन को बाधित कर दिया। भारत को भी इसका सामना करना पड़ा, खासकर रूस से तेल खरीदने के कारण लगाए गए अतिरिक्त शुल्कों के रूप में। इन कदमों का सबसे ज्यादा असर उन छोटे और मध्यम निर्यातकों पर पड़ा है, जिनके पास बड़े झटकों को सहने की सीमित क्षमता होती है। नतीजतन, कई एमएसएमई इकाइयों के सामने लागत बढ़ने, ऑर्डर घटने और मुनाफा सिमटने जैसी समस्याएं खड़ी हो गईं हैं। सरकार ने स्थिति को संभालने के लिए पहले ही कुछ अहम कदम उठाए हैं।
घरेलू मांग को मजबूत करने और निर्यातकों को राहत देने के उद्देश्य से वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) से जुड़े बड़े सुधार किए गए। इसके बावजूद, अमेरिकी शुल्कों के बाद के झटके अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं। क्रिसिल इंटेलिजेंस की एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका द्वारा लगाए गए ऊंचे टैरिफ का असर खासतौर पर कपड़ा, हीरा और रसायन जैसे क्षेत्रों से जुड़े एमएसएमई पर ज्यादा पड़ा है, क्योंकि ये क्षेत्र बड़े पैमाने पर निर्यात पर निर्भर हैं। इस पृष्ठभूमि में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के सामने बजट 2026 में एमएसएमई को सहारा देने को लेकर बड़ी जिम्मेदारी है। उनसे उम्मीद है कि वे ऐसे कदम उठाएं, जिससे इस क्षेत्र को सस्ता और पर्याप्त कर्ज मिल सके, नई तकनीक अपनाने में मदद मिले और निर्यात के लिए नए वैश्विक बाजारों की तलाश आसान हो।
इससे पहले के बजट में सरकार ने एमएसएमई के लिए क्रेडिट गारंटी कवर को 5 करोड़ रुपए से बढ़ाकर 10 करोड़ रुपए किया था और एमएसएमई की परिभाषा में भी बदलाव किया था। साथ ही, 5 लाख रुपए की सीमा वाला एक विशेष क्रेडिट कार्ड शुरू करने की घोषणा की गई थी, ताकि छोटे उद्यमों की तत्काल वित्तीय जरूरतें पूरी हो सकें। निर्यात को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने अच्छी तरह संचालित एमएसएमई निर्यातकों को 20 करोड़ रुपए तक के टर्म लोन पर गारंटी कवर देने का भी प्रावधान किया। स्टार्टअप्स के लिए भी गारंटी सीमा बढ़ाकर 20 करोड़ रुपए कर दी गई और कुछ प्रमुख क्षेत्रों में गारंटी शुल्क कम किया गया। इन कदमों से कुछ राहत जरूर मिली, लेकिन मौजूदा वैश्विक हालात को देखते हुए बजट 2026 में इससे आगे बढ़कर सोचना जरूरी है।
(एपी सिंह की रिपोर्ट)