Mileage Test: भारत में कारों के माइलेज टेस्ट में बदलाव, 1 अक्टूबर से AC ऑन के साथ होगी टेस्टिंग
केंद्रीय मोटर वाहन नियमों में प्रस्तावित ड्राफ्ट संशोधन के अनुसार, भारत में बनने या आयात होने वाली सभी M1 कैटेगरी (पैसेंजर) कारों का माइलेज टेस्ट अब AIS-213 स्टैंडर्ड के तहत किया जाएगा।
भारत में कारों के माइलेज टेस्ट में बदलाव
Mileage Test: भारत में पैसेंजर कारों के माइलेज दावों को वास्तविक ड्राइविंग अनुभव के करीब लाने के लिए केंद्र सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने प्रस्ताव दिया है कि 1 अक्टूबर 2026 से फ्यूल एफिशिएंसी टेस्टिंग के दौरान एयर कंडीशनर (AC) चालू रखना अनिवार्य होगा। इससे कार कंपनियों द्वारा बताए जाने वाले माइलेज और जमीनी हकीकत के बीच का अंतर कम होने की उम्मीद है।
कौन-सा नियम बदलेगा?
केंद्रीय मोटर वाहन नियमों में प्रस्तावित ड्राफ्ट संशोधन के अनुसार, भारत में बनने या आयात होने वाली सभी M1 कैटेगरी (पैसेंजर) कारों का माइलेज टेस्ट अब AIS-213 स्टैंडर्ड के तहत किया जाएगा।
इस नए मानक में:
माइलेज टेस्ट के दौरान AC ऑन रहेगा
इससे उपभोक्ताओं को ज्यादा यथार्थवादी माइलेज आंकड़े मिलेंगे। वाहन निर्माताओं के लिए अनुपालन की शर्तें सख्त होंगी। ड्राफ्ट नियमों पर 30 दिनों तक सार्वजनिक आपत्तियां और सुझाव मांगे गए हैं।
सेफ्टी टेस्टिंग में भी बड़ा अपडेट
मंत्रालय ने वाहन सुरक्षा आकलन को और मजबूत करने के लिए Bharat NCAP 2 के नए मानकों का प्रस्ताव भी रखा है, जो 1 अक्टूबर 2027 से लागू होंगे। नवंबर 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, Bharat NCAP 2 में पहली बार कमजोर सड़क उपयोगकर्ता (VRU) सुरक्षा को कुल रेटिंग में 20% वेटेज दिया गया है, जो यूरोपीय मानकों के अनुरूप है।
Bharat NCAP 2 के आकलन क्षेत्र
क्रैश प्रोटेक्शन: 55%
कमजोर सड़क उपयोगकर्ता प्रोटेक्शन: 20%
सेफ ड्राइविंग फीचर्स: 10%
क्रैश अवॉइडेंस: 10%
पोस्ट-क्रैश सेफ्टी: 5%
उपभोक्ताओं पर क्या असर पड़ेगा?
विशेषज्ञों के मुताबिक, AC ऑन के साथ टेस्टिंग से शुरुआती तौर पर घोषित माइलेज थोड़ा कम दिख सकता है, लेकिन यह वास्तविक ड्राइविंग अनुभव के ज्यादा करीब होगा। कुल मिलाकर, यह बदलाव माइलेज और सेफ्टी दावों को ज्यादा पारदर्शी, भरोसेमंद और उपभोक्ता-केंद्रित बनाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
(मंजू कुमारी)