Middle East War: ईरान और इजरायल के बीच छिड़ा संघर्ष अब अपने सबसे निर्णायक और खतरनाक दौर में पहुँच चुका है। ताजा रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के प्रमुख और इजरायली रक्षा बलों (IDF) के प्रमुख के बीच एक गोपनीय 'सीक्रेट मीटिंग' हुई है।
इस बैठक का मुख्य उद्देश्य ईरान के खिलाफ संभावित 'ग्राउंड ऑपरेशन' की रूपरेखा तैयार करना और दोनों सेनाओं के बीच सामरिक तालमेल बैठाना था। पेंटागन ने अब केवल हवाई हमलों से आगे बढ़कर ईरान के भीतर घुसकर सैन्य ठिकानों को नष्ट करने का 'ब्लूप्रिंट' तैयार कर लिया गया है।
सीक्रेट मीटिंग और 'ऑपरेशन डेजर्ट स्ट्राइक' का खाका
अमेरिकी सेंटकॉम चीफ और आईडीएफ चीफ की यह मुलाकात एक अज्ञात स्थान पर हुई, जहाँ दोनों देशों के शीर्ष सैन्य रणनीतिकार भी मौजूद थे। बैठक में ईरान के उन 'हाइवे' और 'मिसाइल रूट्स' की पहचान की गई जहाँ से इजरायल पर हमले किए जा रहे हैं।
योजना यह है कि अमेरिकी मरीन कमांडो और इजरायली पैराट्रूपर्स एक साथ ईरान के तटीय इलाकों में उतरें और महत्वपूर्ण संचार केंद्रों पर कब्जा कर लें। इस ऑपरेशन को 'सर्जिकल स्ट्राइक' से कहीं बड़े स्तर पर ले जाने की तैयारी है, ताकि ईरान की जवाबी हमला करने की क्षमता को पूरी तरह पंगु बनाया जा सके।
पेंटागन का 'अंतिम प्रहार' प्लान और टारगेट ईरान
पेंटागन की इस नई रणनीति में ईरान के परमाणु केंद्रों के साथ-साथ उसके 'रिवोल्यूशनरी गार्ड्स' (IRGC) के मुख्यालयों को मुख्य लक्ष्य बनाया गया है। सेंटकॉम चीफ ने स्पष्ट किया है कि यदि ईरान ने अपनी परमाणु दहलीज को पार करने की कोशिश की, तो अमेरिका मूकदर्शक नहीं रहेगा।
इस योजना के तहत खार्ग द्वीप और बुशहर जैसे इलाकों में 'ग्राउंड रेड्स' की जा सकती है। अमेरिका इस ऑपरेशन में अपने 'बी-2 स्पिरिट' स्टेल्थ बॉम्बर्स और 'यूएसएस त्रिपोली' पर तैनात अत्याधुनिक एफ-35 लड़ाकू विमानों का बैकअप भी देगा, ताकि जमीन पर लड़ रहे सैनिकों को हवाई सुरक्षा मिल सके।
होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ता तनाव और वैश्विक चिंता
इस सीक्रेट मीटिंग की खबर लीक होने के बाद 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) में तनाव अपने चरम पर है। ईरान ने पहले ही चेतावनी दी है कि यदि किसी भी विदेशी सैनिक ने उसकी संप्रभुता का उल्लंघन किया, तो वह इस जलमार्ग को 'अमेरिकी सेना का कब्रिस्तान' बना देगा।
दुनिया भर के कूटनीतिज्ञ इसे तीसरे विश्व युद्ध की आहट मान रहे हैं क्योंकि चीन और रूस ने भी इस संभावित ग्राउंड ऑपरेशन के खिलाफ अमेरिका को कड़ी चेतावनी दी है। यदि यह हमला होता है, तो वैश्विक तेल आपूर्ति पूरी तरह ठप हो सकती है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था धराशायी होने का खतरा है।
इजरायल की सुरक्षा और ट्रंप का सख्त निर्देश
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले ही अमेरिकी सैन्य कमांडरों को 'फ्री हैंड' दे रखा है कि वे इजरायल की सुरक्षा के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं। इस सीक्रेट मीटिंग को ट्रंप के उसी निर्देश का हिस्सा माना जा रहा है।
इजरायली सेना प्रमुख ने बैठक के बाद कहा कि "दुश्मन के घर में घुसकर वार करने का समय आ गया है।" अब पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या अमेरिका वाकई में ईरान की धरती पर अपनी सेना उतारेगा या यह केवल तेहरान पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की एक सोची-समझी रणनीति है।