Iran War: ईरान के साथ जारी सैन्य संघर्ष के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उन देशों पर निशाना साधा है जिन्होंने इस युद्ध में अमेरिका का साथ नहीं दिया। मंगलवार, 31 मार्च को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' (Truth Social) पर एक बेहद आक्रामक पोस्ट में ट्रंप ने उन देशों को नसीहत दी जो होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के बंद होने से ईंधन की किल्लत झेल रहे हैं।
ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा कि जो देश ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई में पीछे हट गए थे, वे अब खुद अपनी सुरक्षा करें और अपना तेल हासिल करने के लिए खुद साहस दिखाएं।
ट्रंप ने ब्रिटेन को सुनाई खरी-खोटी
डोनाल्ड ट्रंप ने विशेष रूप से यूनाइटेड किंगडम (UK) का नाम लेते हुए तंज कसा। उन्होंने लिखा कि जिन देशों को होर्मुज के रास्ते तेल या जेट फ्यूल नहीं मिल पा रहा है, उनके लिए मेरे दो सुझाव हैं: पहला, वे अमेरिका से तेल खरीदें क्योंकि हमारे पास पर्याप्त भंडार है। दूसरा, वे थोड़ा साहस जुटाएं और खुद होर्मुज जाकर अपना तेल लें।
ट्रंप ने कड़े लहजे में कहा कि अब इन देशों को खुद लड़ना सीखना होगा क्योंकि अमेरिका अब उनकी मदद के लिए वहां मौजूद नहीं रहेगा। ट्रंप के अनुसार, अमेरिका ने ईरान को लगभग तबाह कर दिया है और अब 'कठिन काम' पूरा हो चुका है।
ईरान को 'मिटा देने' की चेतावनी और खार्ग द्वीप पर नजर
इससे पहले सोमवार को ट्रंप ने ईरान को सीधी धमकी देते हुए कहा था कि अगर जल्द ही कोई समझौता नहीं हुआ, तो वे ईरान के बिजली संयंत्रों, तेल के कुओं और खार्ग द्वीप को पूरी तरह से 'नेस्तनाबूद' कर देंगे। बता दें कि खार्ग द्वीप ईरान के तेल निर्यात का लगभग 90% हिस्सा संभालता है। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि अब तक अमेरिका ने ईरान के ऊर्जा बुनियादी ढांचे को नुकसान नहीं पहुंचाया था, लेकिन अगर होर्मुज जलडमरूमध्य को व्यापार के लिए तुरंत नहीं खोला गया, तो अमेरिका कड़े कदम उठाएगा।
ईरान ने सीधी बातचीत से किया इनकार
दूसरी ओर, ईरान ने अमेरिका के साथ किसी भी आधिकारिक बातचीत की खबरों को सिरे से खारिज कर दिया है। मुंबई स्थित ईरानी महावाणिज्य दूतावास के अनुसार, तेहरान को मध्यस्थों के माध्यम से केवल 'अनुचित और अत्यधिक मांगें' प्राप्त हुई हैं। ईरान ने साफ किया कि उसने पाकिस्तान की मध्यस्थता वाली किसी भी कोशिश में हिस्सा नहीं लिया है। ईरान ने युद्ध को समाप्त करने के आह्वान का स्वागत तो किया, लेकिन दोहराया कि इस संघर्ष की शुरुआत अमेरिका ने की थी। वर्तमान में दुनिया की 20% तेल और गैस सप्लाई इसी समुद्री मार्ग से बाधित है, जिससे वैश्विक ऊर्जा संकट गहरा गया है।