अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा दावा करते हुए दुनिया को चौंका दिया है। ट्रंप का कहना है कि अमेरिका और ईरान एक ऐसी ऐतिहासिक परमाणु डील के बेहद करीब हैं, जिसके तहत ईरान अपना सारा संवर्धित यूरेनियम अमेरिका को सौंपने पर राजी हो गया है।
ट्रंप ने इसे 'न्यूक्लियर डस्ट' नाम दिया है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि ट्रंप ने कहा कि अमेरिका अपनी विशाल मशीनों और 'एक्सकवेटर्स' के साथ ईरान के अंदर जाएगा और उन परमाणु केंद्रों से यूरेनियम खोदकर बाहर निकालेगा, जिन्हें पिछले साल अमेरिकी हमलों में निशाना बनाया गया था।
इस समझौते की मध्यस्थता पाकिस्तान कर रहा है। ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि अगर सब कुछ योजना के मुताबिक रहा, तो वह इस डील पर हस्ताक्षर करने के लिए खुद इस्लामाबाद जा सकते हैं।
अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम पर अगले 20 सालों के लिए पूरी तरह रोक लगा दे। हालांकि ईरान ने 3 से 5 साल के 'पॉज' का प्रस्ताव दिया था, लेकिन ट्रंप के दबाव के बाद अब स्थितियां बदलती नजर आ रही हैं। ट्रंप ने साफ कर दिया है कि जब तक समझौता साइन नहीं होता, तब तक होर्मुज स्ट्रेट की नाकेबंदी नहीं हटाई जाएगी।
आमतौर पर ऐसी अंतरराष्ट्रीय संधियों में अरबों डॉलर के फंड जारी किए जाते हैं, लेकिन ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि इस बार ईरान को कोई 'Frozen Funds' या नकद पैसा नहीं दिया जाएगा। इसके बदले अमेरिका ईरान पर लगे कड़े प्रतिबंधों और टैरिफ में राहत देने पर विचार कर सकता है। ट्रंप का कहना है कि ईरान अब परमाणु हथियार न बनाने के लिए पूरी तरह सहमत है।
एक तरफ जहाँ ट्रंप इस समझौते को अपनी बड़ी जीत बता रहे हैं, वहीं ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने यूरेनियम सौंपने की बात से इनकार किया है। ईरान का कहना है कि संवर्धित यूरेनियम उनकी 'पवित्र मिट्टी' की तरह है और इसे किसी दूसरे देश को नहीं दिया जाएगा।
हालांकि, जानकारों का मानना है कि पर्दे के पीछे ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंधों और सैन्य दबाव का इतना असर है कि वह बीच का रास्ता निकालने को मजबूर हो सकता है।
ट्रंप ने एरिजोना में एक रैली के दौरान खुलासा किया कि पिछले साल हुए अमेरिकी ऑपरेशन 'मिडनाइट हैमर' में ईरान के जो अंडरग्राउंड परमाणु ठिकाने तबाह हुए थे, उनमें अभी भी रेडियोधर्मी अवशेष दबे हुए हैं।
अमेरिका इन अवशेषों को सुरक्षित रूप से निकालकर नष्ट करना चाहता है ताकि भविष्य में ईरान इनका उपयोग परमाणु बम बनाने के लिए न कर सके।