राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप टैरिफ नीति के तहत बड़ा फैसला लिया जिसके तहत अमेरिका में आयात होने वाली सभी विदेशी पेटेंट (ब्रांडेड) दवाओं पर 100% टैरिफ लगाया जाएगा। इस आदेश का मुख्य उद्देश्य अमेरिका की विदेशी दवाओं पर निर्भरता को खत्म करना और दवा कंपनियों को अपनी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स वापस अमेरिका लाने के लिए मजबूर करना है।
व्हाइट हाउस के अधिकारियों के अनुसार, बड़ी दवा कंपनियों के पास 'रीशोरिंग' समझौते के लिए 120 दिन का समय होगा, जबकि छोटी कंपनियों को 180 दिन की मोहलत दी गई है। जो कंपनियां अमेरिका में प्लांट लगाने या कीमतों में भारी कटौती का समझौता नहीं करेंगी, उन्हें इस भारी-भरकम शुल्क का सामना करना पड़ेगा।
The Trump administration will impose tariffs of as much as 100% on certain imported medicines, albeit with several key exemptions https://t.co/AgCzVcGOA2
— Bloomberg (@business) April 2, 2026
🚨 BREAKING: President Trump has just slapped a whopping 100% PERCENT TARIFF on Big Pharma drugs who refused to give Americans lower Most Favored Nations pricing
— Eric Daugherty (@EricLDaugh) April 2, 2026
One way to lower their tariffs is to ONSHORE PRODUCTION to the USA! 🔥
Another win from President Trump 🇺🇸 pic.twitter.com/HeQSTbi90e
हालांकि, फिलहाल जेनेरिक दवाओं को इस दायरे से बाहर रखा गया है, लेकिन उन पर भी भविष्य में कार्रवाई की तलवार लटक रही है।
स्टील, एल्युमीनियम और तांबे के आयात शुल्क में बड़ा फेरबदल
दवाओं के साथ-साथ ट्रंप ने धातुओं के आयात पर लगने वाले 'धारा 232' के तहत राष्ट्रीय सुरक्षा शुल्क में भी संशोधन किया है। नए ढांचे के अनुसार, अमेरिका स्टील, एल्युमीनियम और तांबे के कच्चे माल पर 50% का आयात शुल्क बरकरार रखेगा, लेकिन अब यह शुल्क घोषित आयात मूल्य के बजाय अमेरिकी बाजार में चल रही कीमतों के आधार पर वसूला जाएगा।
यह बदलाव इसलिए किया गया है ताकि विदेशी निर्यातक अपनी कीमतों को कम दिखाकर टैक्स चोरी न कर सकें। इस संशोधन से उन देशों को तगड़ा झटका लगा है जो अब तक कम कीमत दिखाकर अमेरिकी बाजार में अपना धातु खपाते रहे थे।
छोटे उत्पादों को राहत और डेरिवेटिव्स पर 25% का फ्लैट टैक्स
नए धातु टैरिफ नियमों में एक महत्वपूर्ण सरलीकरण भी किया गया है। ट्रंप प्रशासन ने घोषणा की है कि यदि किसी तैयार उत्पाद (जैसे इत्र की बोतल का ढक्कन या घरेलू सामान) में स्टील, एल्युमीनियम या तांबे की मात्रा वजन के हिसाब से 15% से कम है, तो उस पर कोई अलग से धातु शुल्क नहीं लगेगा।
हालांकि, जिन उत्पादों में इन धातुओं की मात्रा 15% से अधिक है, उन पर अब उत्पाद के पूरे मूल्य का 25% फ्लैट टैरिफ लगाया जाएगा। पहले यह गणना केवल उत्पाद में मौजूद धातु की मात्रा पर होती थी, जो काफी जटिल थी। प्रशासन का मानना है कि इस सरलीकरण से व्यापार में पारदर्शिता आएगी और घरेलू उद्योगों को निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा का मौका मिलेगा।
भारत और अन्य निर्यातक देशों पर पड़ने वाला रणनीतिक प्रभाव
ट्रंप के इन फैसलों का भारत जैसे प्रमुख निर्यातक देशों पर गहरा असर पड़ने वाला है। भारतीय फार्मा कंपनियां, जो अमेरिका को भारी मात्रा में दवाएं निर्यात करती हैं, अब सीधे तौर पर 100% टैरिफ की रडार पर आ गई हैं।
यदि भारतीय कंपनियां अमेरिकी स्वास्थ्य विभाग (HHS) के साथ 'मोस्ट फेवर्ड नेशन' (MFN) मूल्य निर्धारण या विनिर्माण हस्तांतरण का समझौता नहीं करती हैं, तो उनके लिए अमेरिकी बाजार में बने रहना मुश्किल होगा।
इसी तरह, भारत के धातु निर्यातकों को भी संशोधित 25% और 50% के नए नियमों के तहत अपनी व्यापारिक रणनीतियां बदलनी होंगी। जानकारों का मानना है कि ट्रंप का यह कदम वैश्विक 'ट्रेड वॉर' को फिर से हवा दे सकता है, जिससे उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतें बढ़ सकती हैं।










