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आर्थिक बदहाली से जूझ रहे पाकिस्तान में जनता पर एक और 'फ्यूल बम' गिरा है। शहबाज सरकार ने पेट्रोल की कीमतों में 137 रुपये और डीजल में 184 रुपये की भारी बढ़ोतरी कर दी है, जिससे महंगाई चरम पर पहुंच गई है।

पड़ोसी देश पाकिस्तान में महंगाई ने पिछले सभी रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं। गुरुवार देर रात सरकार ने पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों में अब तक की सबसे बड़ी वृद्धि का ऐलान किया।

नई घोषणा के बाद पाकिस्तान में एक लीटर पेट्रोल की कीमत 458.41 रुपये और डीजल की कीमत 520.35 रुपये प्रति लीटर पर पहुँच गई है।

सरकार के इस फैसले से पाकिस्तान की आम जनता के बीच गहरा रोष है, क्योंकि एक ही झटके में पेट्रोल में 137.24 रुपये और डीजल में 184.49 रुपये का इजाफा किया गया है।

​मिडिल ईस्ट संकट और IMF की शर्तें बनीं भारी वृद्धि की वजह 
सरकार ने इस बेतहाशा बढ़ोतरी के पीछे मुख्य रूप से दो कारण बताए हैं। पहला, मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की सप्लाई बाधित हुई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें बढ़ गई हैं। दूसरा बड़ा कारण अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के साथ हुआ समझौता है।

पाकिस्तान को आर्थिक मदद हासिल करने के लिए पेट्रोलियम लेवी में रिकॉर्ड वृद्धि करनी पड़ी है। वित्त मंत्री ने स्वीकार किया कि पाकिस्तान पर भारी वित्तीय दबाव है और अंतरराष्ट्रीय समझौतों के कारण सब्सिडी देना अब मुमकिन नहीं रह गया है, जिसके चलते यह कड़ा फैसला लेना पड़ा।

​ट्रांसपोर्टेशन ठप और बढ़ती महंगाई से अवाम में हाहाकार 
डीजल की कीमतों में 184 रुपये की रिकॉर्ड तोड़ वृद्धि का सीधा असर पाकिस्तान के परिवहन और कृषि क्षेत्र पर पड़ने वाला है। डीजल ₹520 प्रति लीटर होने से माल ढुलाई की लागत दोगुनी हो सकती है, जिससे फल, सब्जी और अनाज जैसी बुनियादी चीजों के दाम आसमान छूने लगे हैं।

आम आदमी की रसोई भी इससे अछूती नहीं है, क्योंकि केरोसिन तेल की कीमतों में भी करीब 34 रुपये का इजाफा कर इसे 467 रुपये प्रति लीटर तक पहुँचा दिया गया है।

पाकिस्तान के प्रमुख शहरों कराची, लाहौर और इस्लामाबाद में लोग सड़कों पर उतरकर सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं और इसे 'आर्थिक कत्लेआम' करार दे रहे हैं।

​दोपहिया वाहनों के लिए राहत की कोशिश और सरकार का बचाव 
भारी आलोचना के बीच सरकार ने मध्यम वर्ग को कुछ राहत देने के लिए एक 'टारगेटेड सब्सिडी प्रोग्राम' का ऐलान किया है। वित्त मंत्री औरंगजेब के अनुसार, दोपहिया वाहनों और रिक्शा चालकों के लिए 100 रुपये प्रति लीटर की सब्सिडी देने का प्रस्ताव है ताकि उन पर बोझ कम किया जा सके।

हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी व्यापक महंगाई के बीच यह छोटी राहत ऊंट के मुंह में जीरे के समान है। सरकार का तर्क है कि समय पर लिए गए इन फैसलों से कम से कम तेल की आपूर्ति सुनिश्चित रहेगी, अन्यथा देश में 'ड्राय आउट' जैसी स्थिति पैदा हो सकती थी।

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