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पाकिस्तान इस समय तेल, आटा और युद्ध के 'ट्रिपल अटैक' का सामना कर रहा है। मिडिल ईस्ट युद्ध के कारण तेल संकट और अफगानिस्तान के साथ जंग के कारण बढ़ी महंगाई ने देश की जीडीपी को तगड़ा झटका दिया है।

नई दिल्ली : पड़ोसी देश पाकिस्तान इस समय चौतरफा मुसीबतों से घिरा हुआ है। एक तरफ मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध ने पाकिस्तान की कमर तोड़ दी है, तो दूसरी तरफ अफगानिस्तान के साथ शुरू हुई सीधी जंग ने आग में घी डालने का काम किया है।

इन सबके बीच आसमान छूती महंगाई और अरबों डॉलर के कर्ज के बोझ ने आम पाकिस्तानी जनता का 'तेल' निकाल दिया है। हालात इतने बदतर हैं कि देश अब पूरी तरह दिवालिया होने की कगार पर खड़ा है।

​पहला अटैक: मिडिल ईस्ट वॉर और तेल का गहराता संकट

​मिडिल ईस्ट में जारी ईरान-इजरायल युद्ध का सबसे घातक असर पाकिस्तान पर पड़ा है। तेल के आयात पर पूरी तरह निर्भर पाकिस्तान में ईंधन की भारी कमी हो गई है। कच्चे तेल की सप्लाई बाधित होने से पेट्रोल-डीजल के दाम आसमान छू रहे हैं।

सरकारी गाड़ियों के तेल में 60% तक की कटौती कर दी गई है और मंत्रियों-सांसदों की सैलरी काटी जा रही है। पूर्व वित्त मंत्री हाफिज पाशा ने चेतावनी दी है कि अगर क्रूड ऑयल 100 डॉलर के पार रहा, तो पाकिस्तान की जीडीपी (GDP) 1.5% तक गिर सकती है।

​दूसरा अटैक: अफगानिस्तान के साथ 'खूनी संघर्ष' और महंगाई का कोहराम

​अफगानिस्तान के साथ डूरंड लाइन पर जारी तनाव अब भीषण युद्ध का रूप ले चुका है। इस जंग ने पाकिस्तान की इकोनॉमी पर गहरा जख्म दिया है। सीमा पर तनाव के कारण आयात-निर्यात पूरी तरह सुस्त पड़ गया है, जिससे खाने-पीने की चीजों की किल्लत हो गई है। ब्यूरो ऑफ स्टैटिस्टिक्स के मुताबिक, साप्ताहिक महंगाई सूचकांक (SPI) में भारी उछाल आया है। ब्रेड, दूध, आटा, दाल और चावल जैसी बुनियादी चीजों के दाम बेतहाशा बढ़ गए हैं, जिससे जनता दाने-दाने को मोहताज है।

​तीसरा अटैक: कर्ज का 'पहाड़' और IMF की गुलामी

​पाकिस्तान इस समय दुनिया का सबसे बड़ा कर्जदार देश बन चुका है। स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान (SBP) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी 2026 तक देश का कुल कर्ज 79,322 अरब पाकिस्तानी रुपये तक पहुँच गया है, जो उसकी जीडीपी का करीब 70% है।

पाकिस्तान 1958 से अब तक 26 बार IMF से बेलआउट पैकेज ले चुका है। अर्थशास्त्रियों का कहना है कि IMF के कर्ज के सहारे चल रहा पाकिस्तान पहले से ही 'डेड' (मृत) स्थिति में है, और अब ग्लोबल हालात उसे पूरी तरह खत्म कर सकते हैं।

​कोरोना काल जैसे हालात: सरकारी खर्चों में भारी कटौती

​आर्थिक बदहाली का आलम यह है कि पाकिस्तान सरकार ने कोरोना काल जैसी पाबंदियां लागू कर दी हैं। सरकारी विभागों के गैर-जरूरी खर्चों में 20% की कटौती की गई है। बैठकों को 'वर्चुअल' मोड पर शिफ्ट कर दिया गया है और कई इलाकों में पढ़ाई को ऑनलाइन कर दिया गया है ताकि बिजली और पेट्रोल की बचत की जा सके। मंत्रियों के विदेश दौरों और शाही खर्चों पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है।

​$120 प्रति बैरल का डर: क्या फिर मचेगा आटे के लिए कत्लेआम?

​अगर रूस-यूक्रेन युद्ध के समय की तरह कच्चे तेल की कीमतें फिर से 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुँचती हैं, तो पाकिस्तान में महंगाई दर 30% के पार जा सकती है। इससे पहले भी पाकिस्तान में लोग एक बोरी आटे के लिए अपनी जान पर खेलते नजर आए थे। अब फ्यूल और फूड का यह 'कॉम्बो अटैक' पाकिस्तान को उस दौर में वापस ले जा रहा है जहाँ गृहयुद्ध जैसे हालात पैदा हो सकते हैं।

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