नई दिल्ली : इजरायल और अमेरिका के 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' ने ईरान के सैन्य और राजनीतिक ढांचे को पूरी तरह झकझोर कर रख दिया है। ईरान के नवनियुक्त रक्षा मंत्री सैयद माजिद अब अल-रेज़ा पद संभालने के महज 24 से 48 घंटों के भीतर ही एक सटीक इजरायली मिसाइल हमले में मारे गए हैं। तेहरान और अन्य प्रमुख शहर अब खंडहर में तब्दील हो रहे हैं, जिससे यह सवाल उठने लगा है कि क्या ईरान अब पूरी तरह सरेंडर करने की कगार पर है।
इतिहास का सबसे छोटा कार्यकाल और माजिद का अंत
ईरान के रक्षा मंत्रालय में अभी पुराने रक्षा मंत्री अजीज नासिरजादेह की मौत का मातम खत्म भी नहीं हुआ था कि नए मंत्री सैयद माजिद को निशाना बना लिया गया। इजरायली खुफिया एजेंसी 'मोसाद' की पैनी नजरों से माजिद बच नहीं सके और महज एक दिन के कार्यकाल के साथ ही उनका नाम इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया। इजरायल ने आधिकारिक तौर पर दावा किया है कि माजिद एक गुप्त सैन्य ठिकाने पर रणनीतिक बैठक कर रहे थे, तभी सटीक मिसाइलों ने पूरे परिसर को मलबे के ढेर में बदल दिया।
ईरान की टॉप लीडरशिप का 'द एंड'
इजरायल और अमेरिका की संयुक्त 'सर्जिकल स्ट्राइक' ने ईरान के सैन्य ढांचे की कमर तोड़ दी है। ईरान के सबसे ताकतवर इंसान और सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के साथ-साथ रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) के प्रमुख और सुरक्षा सलाहकार अली शमखानी भी मारे जा चुके हैं। अब रक्षा मंत्री की मौत के बाद ईरान की स्थिति उस 'बिना सिर के धड़' जैसी हो गई है, जिसके पास न तो कोई बड़ा नेता बचा है और न ही युद्ध की रणनीति बनाने वाला कोई जनरल।
'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' और तबाही का मंजर
ईरान में तबाही की शुरुआत शनिवार से हुई थी, जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल ने मिलकर तेहरान पर बमों की बारिश शुरू की। रेड क्रीसेंट सोसाइटी के आंकड़ों के मुताबिक, मंगलवार तक मौतों की संख्या 787 तक पहुंच गई है। तेहरान, इस्फहान और होर्मोजगान जैसे शहर अब खंडहर में तब्दील हो चुके हैं और अस्पतालों में लाशों का अंबार लगा है। इजरायल की जवाबी कार्रवाई अब ईरान की ओर से केवल कमजोर मिसाइल हमलों तक सिमट कर रह गई है।
ट्रंप की ईरानी जनता से अपील और परमाणु लक्ष्य
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक वीडियो संदेश के माध्यम से ईरानी जनता से सीधे संवाद किया है। उन्होंने जनता से अपील की है कि वे खामेनेई शासन के अवशेषों के खिलाफ खड़े हों और अपनी नई लोकतांत्रिक सरकार बनाएं। ट्रंप ने यह भी साफ कर दिया है कि जब तक ईरान का परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह नष्ट नहीं हो जाता और वहां की जनता अपनी नई सरकार नहीं बना लेती, तब तक यह भारी बमबारी जारी रहेगी।