Middle East Crisis: पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका के बीच जारी सैन्य टकराव ने 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) को दुनिया का सबसे खतरनाक समुद्री रास्ता बना दिया है। इसी रास्ते से दुनिया का एक-तिहाई तेल और गैस निर्यात होता है।
भारत के लिए चिंता की बात यह थी कि उसके कई एलपीजी टैंकर इस युद्ध क्षेत्र में फंसे हुए थे। भारत का एक प्रमुख एलपीजी टैंकर तमाम जोखिमों को पीछे छोड़ते हुए सफलतापूर्वक कर्नाटक के न्यू मैंगलोर बंदरगाह पहुंच गया है।
इस जहाज की सुरक्षा के लिए भारतीय नौसेना और अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट पर थीं, क्योंकि इस रास्ते में 21 से अधिक अमेरिकी युद्धपोत तैनात हैं और ईरान की मिसाइलें तनी हुई हैं।
सुरक्षा के लिहाज से सबसे राहत की बात यह है कि इस जहाज पर सवार सभी 27 नाविक भारतीय नागरिक हैं। मिडिल-ईस्ट के जोखिम भरे समुद्री रास्तों को पार कर आए इस जहाज के कार्गो में 23,653 मीट्रिक टन प्रोपेन और 22,926 मीट्रिक टन ब्यूटेन शामिल है। यह सप्लाई घरेलू और औद्योगिक ईंधन की जरूरतों को पूरा करने में संजीवनी का काम करेगी।
मैंगलोर की ओर बढ़ रहा 'BW ELM': 1 अप्रैल को होगी लैंडिंग
अब एक दूसरा एलपीजी कैरियर 'BW ELM' भी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पार करने के बाद कर्नाटक के न्यू मैंगलोर बंदरगाह की ओर तेजी से बढ़ रहा है। ताजा जानकारी के मुताबिक, यह जहाज दोपहर 12 बजे तक मैंगलोर पहुँच जाएगा।
यह जहाज हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) के लिए ईंधन लेकर आ रहा है। इस मिशन की सफलता भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए मील का पत्थर मानी जा रही है क्योंकि युद्ध के मुहाने पर खड़े रास्ते से माल सुरक्षित लाना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं था।
भारतीय नाविकों की सुरक्षा और भारी कार्गो क्षमता
इन दोनों जहाजों पर कुल 55 भारतीय नाविक (BW TYR पर 27 और BW ELM पर 28) सवार हैं, जो सुरक्षित हैं। 'BW ELM' की क्षमता की बात करें तो इसमें 23,860 मीट्रिक टन प्रोपेन और 23,139 मीट्रिक टन ब्यूटेन लदा हुआ है। इन दोनों जहाजों को मिलाकर भारत को लगभग 93,500 मीट्रिक टन से अधिक गैस की आपूर्ति सुनिश्चित हुई है।
दिल्ली जैसे महानगरों में जहाँ गैस संकट के चलते केवल 20% सप्लाई का नियम लागू करने की नौबत आ गई थी, वहाँ इन जहाजों के पहुँचने से स्थिति में तेजी से सुधार होने की उम्मीद है।
होर्मुज की घेराबंदी और भारत की कूटनीतिक जीत
वर्तमान में खाड़ी क्षेत्र में 21 अमेरिकी युद्धपोत तैनात हैं और ईरान ने भी जवाबी घेराबंदी कर रखी है। ऐसे में भारतीय ध्वज वाले इन व्यापारिक जहाजों का सुरक्षित निकलना भारत के सफल 'नेवल एस्कॉर्ट' और कूटनीतिक प्रभाव को दर्शाता है।
भारतीय नौसेना के युद्धपोत इन जहाजों की निगरानी कर रहे थे। विशेषज्ञों का मानना है कि इन दो जहाजों के आने से न केवल रसोई गैस के सिलेंडरों की किल्लत दूर होगी, बल्कि कीमतों में होने वाली संभावित बढ़ोतरी पर भी लगाम लगेगी। सरकार अब भविष्य की चुनौतियों को देखते हुए अन्य फंसे हुए जहाजों को सुरक्षित लाने की योजना पर काम कर रही है।