मिडिल-ईस्ट में फंसे हजारों यात्रियों और प्रवासियों के लिए बड़ी राहत की खबर है। ईरान ने अपने एयरस्पेस को अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए दोबारा खोल दिया है।

मिडिल-ईस्ट में महीनों से जारी तनाव और सैन्य गतिविधियों के कारण बंद पड़ा ईरान का एयरस्पेस अब अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए पूरी तरह खोल दिया गया है। ईरान के नागरिक उड्डयन संगठन (CAO) ने आधिकारिक घोषणा करते हुए बताया कि देश के आसमान से अब कमर्शियल और इंटरनेशनल फ्लाइट्स सुरक्षित रूप से गुजर सकेंगी।

यह फैसला होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही शुरू होने और कूटनीतिक वार्ताओं में आई तेजी के बाद लिया गया है। इस कदम से न केवल यात्रा का समय घटेगा, बल्कि खाड़ी देशों में फंसे हजारों लोग अब अपने वतन लौट सकेंगे।

​ईरान का एयरस्पेस बंद होने की वजह से खाड़ी देशों जैसे यूएई, कतर और ओमान से भारत, यूरोप और अमेरिका जाने वाली उड़ानों को लंबे और महंगे रास्तों का सहारा लेना पड़ रहा था। कई एयरलाइंस ने अपनी उड़ानें रद्द कर दी थीं, जिसके कारण हजारों यात्री और कामगार अरब मुल्कों में फंस गए थे।

अब एयरस्पेस खुलने से एयरलाइंस अपना सामान्य रूट बहाल कर सकेंगी, जिससे टिकटों की कीमतों में कमी आएगी और फंसे हुए लोगों की सुरक्षित घर वापसी का रास्ता साफ हो जाएगा।

​विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान ने यह फैसला तब लिया है जब होर्मुज स्ट्रेट से मालवाहक जहाजों के गुजरने की प्रक्रिया दोबारा शुरू हुई है। समुद्री रास्ते और हवाई रास्ते का एक साथ खुलना इस बात का संकेत है कि ईरान अब अंतरराष्ट्रीय दबाव और आर्थिक जरूरतों के बीच कूटनीतिक नरमी दिखा रहा है।

एविएशन सेक्टर के लिए ईरान का रूट 'हार्ट ऑफ द स्काई' माना जाता है, क्योंकि यह एशिया और यूरोप को जोड़ने वाला सबसे छोटा और किफायती रास्ता है।

​एयरस्पेस खुलने के साथ ही एअर इंडिया, इंडिगो और एमिरेट्स जैसी बड़ी एयरलाइंस ने अपने ऑपरेशंस को फिर से व्यवस्थित करना शुरू कर दिया है। पिछले कुछ हफ्तों में विमानों को ईरान को बायपास करने के लिए अतिरिक्त ईंधन खर्च करना पड़ रहा था, जिससे एविएशन कंपनियों पर भारी वित्तीय बोझ पड़ रहा था।

अब सुरक्षित गलियारा मिलने से उड़ानों की फ्रीक्वेंसी बढ़ेगी और यात्रियों को लंबी वेटिंग लिस्ट से निजात मिलेगी।

​भले ही एयरस्पेस खोल दिया गया है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय नियामक संस्थाएं और पायलट एसोसिएशन अभी भी स्थिति पर पैनी नजर रखे हुए हैं। ईरान ने आश्वासन दिया है कि नागरिक उड़ानों की सुरक्षा के लिए विशेष 'नो-कॉम्बैट जोन' सुनिश्चित किए गए हैं। इस्लामाबाद में होने वाली अमेरिका-ईरान वार्ता से पहले ईरान का यह कदम एक 'गुडविल जेस्चर 'के रूप में देखा जा रहा है, जिससे क्षेत्र में शांति की उम्मीदें और प्रबल हो गई हैं।