Iran Rejects Ceasefire: ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच जारी महायुद्ध को रोकने की कोशिशों को सोमवार को बड़ा झटका लगा। ईरान ने पाकिस्तान के शांति प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया। पाकिस्तान ने 'अस्थायी युद्धविराम' के बदले होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने का सुझाव दिया था। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने स्पष्ट कर दिया है कि ईरान किसी भी शॉर्ट-टर्म डील के लिए झुकने वाला नहीं है।
'इस्लामाबाद अकॉर्ड' पर पानी फिरा
पाकिस्तान के आर्मी चीफ फील्ड मार्शल असीम मुनीर इस डील के लिए अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराक्छी के साथ पूरी रात संपर्क में थे। इस प्रस्तावित समझौते को 'इस्लामाबाद अकॉर्ड' का नाम दिया गया था। इसके तहत 45 दिनों के युद्धविराम और होर्मुज को खोलने की योजना थी, जिसके बाद इस्लामाबाद में आमने-सामने की बातचीत होनी थी। हालांकि, ईरान के अड़ियल रुख ने इस पूरी प्रक्रिया पर पानी फेर दिया है।
पुराने 'कड़वे अनुभव' का दिया हवाला
भारत में ईरान के राजदूत डॉ. मोहम्मद फताली ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अतीत में ईरान का अनुभव काफी नकारात्मक रहा है। उन्होंने कहा कि अक्सर 'युद्ध, युद्धविराम और फिर से युद्ध' का एक दोषपूर्ण चक्र चलता रहता है, जिसे ईरान अब दोहराना नहीं चाहता। तेहरान का मानना है कि अमेरिका स्थायी युद्धविराम के लिए तैयार नहीं है, इसलिए वे किसी भी अस्थायी दबाव या समय सीमा (Deadlines) को स्वीकार नहीं करेंगे।
स्थायी गारंटी की मांग पर अड़ा तेहरान
ईरानी अधिकारियों ने साफ कर दिया है कि वे केवल तभी समझौता करेंगे जब उन्हें 'स्थायी युद्धविराम' और इस बात की गारंटी मिलेगी कि अमेरिका या इजरायल उन पर दोबारा हमला नहीं करेंगे। सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तान, तुर्की और मिस्र जैसे देश मध्यस्थता की कोशिश कर रहे हैं। प्रस्तावित डील में ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर रोक के बदले प्रतिबंधों में ढील और जमी हुई संपत्तियों को मुक्त करने की शर्तें भी शामिल थीं, लेकिन फिलहाल ईरान ने इस पर सहमति नहीं जताई है।
होर्मुज बंद रहने से दुनिया पर बढ़ेगा दबाव
होर्मुज जलडमरूमध्य को न खोलने के फैसले ने वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ा दी है। यह समुद्री रास्ता दुनिया के तेल व्यापार की जीवन रेखा माना जाता है। ईरान जानता है कि होर्मुज को बंद रखकर वह अंतरराष्ट्रीय समुदाय पर दबाव बना सकता है। जब तक तेहरान को अपनी शर्तों पर स्थायी सुरक्षा का भरोसा नहीं मिलता, तब तक यह रणनीतिक जलमार्ग बंद रहने के आसार हैं, जिसका सीधा असर ग्लोबल इकोनॉमी और कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ेगा।