मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर ईरान ने बड़ा यू-टर्न लेते हुए इस अहम समुद्री मार्ग को दोबारा बंद करने का फैसला किया है।

तेहरान/वॉशिंगटन। मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर ईरान ने बड़ा यू-टर्न लेते हुए इस अहम समुद्री मार्ग को दोबारा बंद करने का फैसला किया है। इससे पहले ईरान ने इसे खोलने की घोषणा की थी, लेकिन अमेरिका के सख्त रुख के बाद शनिवार को फिर प्रतिबंध लागू कर दिए गए।

ईरान के संयुक्त सैन्य कमांड ने बयान जारी कर कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य अब फिर से सशस्त्र बलों के कड़े नियंत्रण में है और जब तक अमेरिका ईरानी बंदरगाहों पर अपनी नाकेबंदी जारी रखेगा, तब तक इस रास्ते से जहाजों की आवाजाही सीमित रहेगी।

यह फैसला डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान के बाद आया है, जिसमें उन्होंने साफ कहा था कि अमेरिकी नाकेबंदी तब तक जारी रहेगी, जब तक ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर समझौता नहीं करता। ट्रंप के इस रुख ने दोनों देशों के बीच टकराव को और तेज कर दिया है।

गौरतलब है कि 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमले के बाद से ही इस जलमार्ग में जहाजों की आवाजाही प्रभावित रही है। पहले ईरान ने सीजफायर के दौरान इसे खुला रखने की बात कही थी, लेकिन अब हालात फिर बदल गए हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस फैसले का असर समुद्री यातायात पर तुरंत दिखा। कई भारतीय तेल टैंकर जैसे ‘Sanmar Herald’, ‘Desh Garima’, ‘Desh Vaibhav’ और ‘Desh Vibhor’को बीच रास्ते से ही वापस लौटना पड़ा। ये जहाज दुबई से होर्मुज की ओर जा रहे थे, लेकिन अब अधिकतर क़ेश्म आइलैंड के आसपास देखे गए हैं।

बताया जा रहा है कि चार भारतीय और दो ग्रीक जहाज इस अहम समुद्री मार्ग से गुजर नहीं पाए। हालांकि, जहाजों के अचानक लौटने के सटीक कारण स्पष्ट नहीं किए गए हैं।

इससे पहले ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने दावा किया था कि सीजफायर की अवधि के दौरान होर्मुज पूरी तरह खुला रहेगा। लेकिन कुछ ही घंटों बाद ईरान ने अपने रुख में बदलाव करते हुए संकेत दिए कि अगर अमेरिकी नाकेबंदी नहीं हटाई गई, तो यह मार्ग बंद रह सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति का सबसे अहम रास्ता है। ऐसे में इसके बंद होने से अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार और शिपिंग सेक्टर पर बड़ा असर पड़ सकता है।