ईरानी हमलों के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति बाधित होने पर यूरोप के 5 देश और जापान एकजुट हो गए हैं।

नई दिल्ली: मिडल ईस्ट में ईरान-इजरायल युद्ध के कारण दुनिया भर में तेल और गैस की सप्लाई चेन बुरी तरह चरमरा गई है। विशेष रूप से स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में जहाजों पर हो रहे हमलों ने वैश्विक अर्थव्यवस्था की नींद उड़ा दी है।

अब ईरान की इस 'जंग' के खिलाफ दुनिया के 6 प्रमुख देशों-ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, नीदरलैंड और जापान ने एकजुट होकर बड़ा कदम उठाने का फैसला किया है। इन देशों ने एक संयुक्त बयान जारी कर हॉर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए सैन्य और कूटनीतिक सहयोग का वादा किया है।

​क्यों जरूरी है हॉर्मुज? नाकेबंदी से भारत समेत कई देशों में टेंशन 
स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्ग है, जहां से वैश्विक तेल और एलपीजी का बड़ा हिस्सा गुजरता है। ईरान द्वारा व्यापारिक जहाजों पर ड्रोन और विस्फोटक नौकाओं से किए जा रहे हमलों के बाद यहाँ आवाजाही लगभग ठप हो गई है।

सैकड़ों जहाज हॉर्मुज के बाहर फंसे हुए हैं, जिससे भारत जैसे देश, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इस मार्ग पर निर्भर हैं, काफी प्रभावित हुए हैं। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने का खतरा मंडरा रहा है।

​कतर और सऊदी अरब पर हमले की कड़ी निंदा: $20 बिलियन के नुकसान का अनुमान 

​6 देशों के इस समूह ने कतर और सऊदी अरब के तेल एवं गैस संयंत्रों पर हुए हालिया हमलों की तीखी आलोचना की है। 'कतर एनर्जी' के अनुसार, इन हमलों की वजह से उनकी 17% एलएनजी (LNG) निर्यात क्षमता प्रभावित हुई है।

अनुमान है कि इस नाकेबंदी और हमलों के कारण सालाना 20 बिलियन डॉलर के राजस्व का नुकसान हो सकता है। यूरोपीय देशों और जापान ने स्पष्ट किया है कि वे ऊर्जा बाजार को स्थिर करने के लिए अन्य उत्पादक राष्ट्रों के साथ मिलकर काम करेंगे।

​ईरान को सीधी चेतावनी: "अंतरराष्ट्रीय शांति के लिए खतरा" 
संयुक्त बयान में देशों ने चेतावनी दी है कि ईरान की इन सैन्य कार्यवाहियों का असर न केवल क्षेत्र में, बल्कि दुनिया के हर हिस्से के लोगों पर पड़ेगा, खासकर सबसे कमजोर वर्ग पर। उन्होंने कहा कि नागरिक बुनियादी ढांचे और व्यापारिक मार्ग पर हमला अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए सीधा खतरा है। इन देशों ने हमलों पर 'समग्र रोक' लगाने की मांग की है और चेतावनी दी है कि यदि स्थिति नहीं सुधरी तो वे सुरक्षा के लिए कड़े सैन्य कदम उठाएंगे।

​ऊर्जा बाजार को स्थिर करने का 'प्लान-B'

​6 देशों का यह गठबंधन न केवल सुरक्षा बढ़ाएगा, बल्कि तेल उत्पादक देशों के साथ मिलकर उत्पादन बढ़ाने पर भी जोर दे रहा है ताकि बाजार में कच्चे तेल की कमी न हो। इस गठबंधन में जापान का शामिल होना बेहद अहम है, क्योंकि वह अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए पूरी तरह खाड़ी देशों पर निर्भर है। इधर अमेरिका पहले ही 'बंकर बस्टर' बमों के जरिए ईरानी मिसाइल ठिकानों पर प्रहार कर रहा है, जिससे ईरान अब चौतरफा घिरता नजर आ रहा है।