Donald Trump SOTU 2026: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने 'स्टेट ऑफ द यूनियन' (SOTU) संबोधन में पाकिस्तान को लेकर अब तक का सबसे सनसनीखेज दावा किया है। ट्रंप ने अमेरिकी संसद में कहा कि अगर वे हस्तक्षेप नहीं करते, तो पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की जान जा सकती थी। उन्होंने दावा किया कि भारत और पाकिस्तान के बीच होने वाले परमाणु युद्ध को उनके दखल ने ही टाला है।
'मैंने पाकिस्तानी पीएम को मरने से बचाया'
राष्ट्रपति ट्रंप ने मंगलवार रात अमेरिकी कांग्रेस को संबोधित करते हुए अपनी विदेश नीति की उपलब्धियों का बखान किया। इस दौरान उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच पिछले साल मई में हुए तनाव का विशेष रूप से जिक्र किया। ट्रंप ने बड़े गर्व से कहा, "पाकिस्तानी प्रधानमंत्री मारे जाते, अगर मैंने दखल नहीं दिया होता। मैंने उनकी जान बचाई है।" ट्रंप का यह इशारा पिछले साल अप्रैल में पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत द्वारा शुरू किए गए 'ऑपरेशन सिंदूर' की ओर था।
परमाणु युद्ध का दावा
ट्रंप ने दावा किया कि भारत और पाकिस्तान के बीच हालात इतने बिगड़ गए थे कि दोनों देश परमाणु युद्ध की कगार पर खड़े थे। ट्रंप के अनुसार, खुद पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ ने उनसे कहा था कि राष्ट्रपति ट्रंप की वजह से 3.5 करोड़ लोगों की जान बच गई। उन्होंने कहा कि 200% टैरिफ लगाने की उनकी धमकी ने दोनों देशों को युद्ध रोकने के लिए मजबूर कर दिया। ट्रंप ने दावा किया कि उनके दखल के बाद ही दोनों पक्ष शांति की मेज पर आने को राजी हुए।
8 युद्धों को खत्म करने का रिपोर्ट कार्ड
अपने भाषण में ट्रंप ने उन आठ अंतरराष्ट्रीय संघर्षों की सूची भी गिनाई, जिन्हें उन्होंने सुलझाने का दावा किया। इनमें भारत-पाकिस्तान के अलावा इजरायल-ईरान, आर्मेनिया-अजरबैजान और सर्बिया-कोसोवो जैसे बड़े विवाद शामिल थे। ट्रंप ने कहा कि उनके दूसरे कार्यकाल के पहले 10 महीनों में ही दुनिया के कई हिस्सों में शांति कायम हुई है। उन्होंने यह भी कहा कि अब वे रूस-यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध को खत्म करने के बेहद करीब हैं।
भारत ने कूटनीतिक दखल को नकारा
हालांकि, ट्रंप के इन दावों के बीच भारत का रुख हमेशा साफ रहा है। भारत ने बार-बार कहा है कि पाकिस्तान के साथ किसी भी मुद्दे पर तीसरे पक्ष की मध्यस्थता की जरूरत नहीं है। पिछले साल हुए संघर्ष विराम को भी भारत ने द्विपक्षीय बातचीत का नतीजा बताया था। इसके बावजूद, ट्रंप ने अमेरिकी संसद के मंच से खुद को 'दुनिया का रक्षक' बताते हुए इस घटना को अपनी सबसे बड़ी कूटनीतिक जीत के रूप में पेश किया है।