कनाडा के पीएम मार्क कार्नी ने अमेरिकी रक्षा कंपनियों को दिए जाने वाले अरबों डॉलर के रक्षा फंड पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है।

कनाडा के नए प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने कार्यभार संभालते ही डोनल्ड ट्रंप की नीतियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। ट्रंप द्वारा लगाए गए टैरिफ और तीखे बयानों का जवाब देते हुए कनाडा ने अमेरिकी रक्षा कंपनियों को दिए जाने वाले अरबों डॉलर के फंड पर रोक लगा दी है। कार्नी की 'बाय कैनेडियन' नीति ने वॉशिंगटन में हड़कंप मचा दिया है।

​'बाय कैनेडियन' नीति: अब स्थानीय उद्योगों को प्राथमिकता 
​पीएम कार्नी ने स्पष्ट किया कि अब कनाडा सरकार की हर खरीदारी में स्थानीय कंपनियों को वरीयता मिलेगी। इस नई नीति के तहत स्टील, एल्युमीनियम और तकनीकी जरूरतों के लिए अमेरिकी सप्लायर्स के बजाय कनाडाई उद्योगों को चुना जाएगा। यह कदम ट्रंप की 'अमेरिका फर्स्ट' नीति का कड़ा मुकाबला है।

​70 फीसदी रक्षा बजट का रास्ता बदला 
​कनाडा अब तक अपने रक्षा बजट का करीब 70 फीसदी हिस्सा अमेरिकी कंपनियों पर खर्च करता था। कार्नी ने एलान किया है कि अब यह पैसा अमेरिका जाने के बजाय कनाडा के भीतर ही रहेगा। इससे अमेरिकी रक्षा दिग्गजों को करोड़ों डॉलर के नुकसान की आशंका है।

​ट्रंप के 'टैरिफ टेरर' का प्रभावी पलटवार
यह फैसला ट्रंप द्वारा कनाडा पर लगाए गए टैरिफ का सीधा परिणाम है। कार्नी ने दिखा दिया है कि कनाडा अपनी संप्रभुता और आर्थिक हितों के लिए अमेरिका के खिलाफ कड़े फैसले लेने से पीछे नहीं हटेगा। इस कदम से दोनों पड़ोसी देशों के रिश्तों में अब तक की सबसे बड़ी कड़वाहट आ गई है।

​आत्मनिर्भरता की ओर कनाडा के बढ़ते कदम

​मार्क कार्नी ने 'कनाडा फर्स्ट' का नारा बुलंद करते हुए देश को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में यह बड़ा दांव खेला है। हालांकि, कनाडाई कंपनियों के लिए अमेरिकी तकनीक की बराबरी करना एक चुनौती होगी, लेकिन इस फैसले ने ट्रंप प्रशासन को रक्षा और व्यापारिक मोर्चे पर रक्षात्मक होने के लिए मजबूर कर दिया है।