बजट सत्र के दौरान नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और सत्ता पक्ष के बीच टकराव अब नए मोड़ पर पहुंच गया है। राष्ट्रपति के अभिभाषण पर दिए गए उनके तीखे भाषण और लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की चर्चा के बाद राजनीतिक तापमान और बढ़ गया है।
भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी के खिलाफ एक सब्सटेंटिव मोशन पेश किया है। इसमें उनके आचरण और कथित बयानों को संसदीय मर्यादा और राष्ट्रीय हित के खिलाफ बताया गया है। सत्ता पक्ष की ओर से सदस्यता रद्द करने और भविष्य में चुनाव लड़ने पर रोक लगाने जैसी मांगें भी उठ रही हैं।
वहीं कांग्रेस का कहना है कि यह विपक्ष की आवाज दबाने की रणनीति है और आक्रामक राजनीति का जवाब राजनीतिक तरीके से ही दिया जाना चाहिए।
सबसे बड़ा सवाल यही है-
क्या यह संसदीय नियमों का मामला है या राजनीतिक टकराव की चरम स्थिति?
इसी मुद्दे पर हरिभूमि और INH के प्रधान संपादक डॉ. हिमांशु द्विवेदी ने विशेष “चर्चा” में राजनीति और पत्रकारिता से जुड़े दिग्गजों से जानी उनकी राय।
इस खास पेशकश में शामिल हुए-
- रत्नाकर सिंह – प्रवक्ता, भाजपा
- श्रवण गर्ग – वरिष्ठ पत्रकार
- देवेंद्र वर्मा – पूर्व प्रमुख सचिव, छत्तीसगढ़ विधानसभा
- डॉ. हिलाल अहमद – प्रवक्ता, कांग्रेस
