योगी सरकार अखिलेश यादव के समय की मदरसा नियमावली 2016 को बदलने जा रही है। नए नियमों के तहत मदरसों की मान्यता, शिक्षकों की भर्ती और पाठ्यक्रम को अधिक सख्त और पारदर्शी बनाया जाएगा।

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार राज्य के मदरसों के आधुनिकीकरण और उनमें हो रहे कथित फर्जीवाड़े को रोकने के लिए कमर कस चुकी है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर अल्पसंख्यक कल्याण विभाग उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद नियमावली-2016 में संशोधन का ड्राफ्ट तैयार कर रहा है।

आरोप है कि 2016 में बनाई गई नियमावली में कई ऐसी खामियां थीं, जिनका फायदा उठाकर बिना मानकों के मदरसे चलाए जा रहे थे। अब इन नियमों को बदलकर 'अटल मॉडल' और आधुनिक शिक्षा पद्धति के अनुरूप बनाया जाएगा।

​मान्यता और पाठ्यक्रम के नियम होंगे सख्तप्रस्तावित बदलावों के तहत मदरसों को नई मान्यता देने के नियम बेहद कड़े कर दिए जाएंगे।

भूमि और भवन: मदरसे के पास खुद की जमीन और पर्याप्त कमरों का होना अनिवार्य होगा।

आधुनिक शिक्षा: मदरसों में केवल मजहबी तालीम ही नहीं, बल्कि एनसीईआरटी (NCERT) का पाठ्यक्रम लागू करना अनिवार्य होगा। विज्ञान, गणित और अंग्रेजी जैसे विषयों को प्राथमिकता दी जाएगी।

पारदर्शिता: मदरसों के पंजीकरण से लेकर छात्रों के डेटा तक सब कुछ ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज करना होगा।

​शिक्षक भर्ती और पारदर्शिता पर जोर 
नई नियमावली में शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया में भी बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। सरकार का उद्देश्य है कि मदरसों में योग्य और प्रशिक्षित शिक्षक ही तैनात हों। अब तक मदरसों में प्रबंधन तंत्र की मर्जी से होने वाली नियुक्तियों पर लगाम कसने की तैयारी है।

भर्ती के लिए न्यूनतम योग्यता के मानक बढ़ाए जाएंगे ताकि छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके। इसके अलावा, मदरसों को मिलने वाले सरकारी अनुदान के ऑडिट और उपयोग की निगरानी के नियम भी सख्त किए जा रहे हैं।

​क्यों पड़ी बदलाव की जरूरत? 
एसआईटी (SIT) की जांच और जिलों से मिली रिपोर्टों में सामने आया है कि कई मदरसे केवल कागजों पर चल रहे थे या उनके पास बुनियादी ढांचा नहीं था। 2016 की नियमावली में जांच और कार्रवाई के प्रावधान उतने प्रभावी नहीं थे।

योगी सरकार का मानना है कि मदरसा शिक्षा को मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ना जरूरी है ताकि वहां से निकलने वाले छात्र भी डॉक्टर, इंजीनियर और प्रशासनिक अधिकारी बन सकें। जल्द ही इस संशोधन प्रस्ताव को कैबिनेट की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।