उत्तर प्रदेश में स्मार्ट मीटरों को लेकर चल रहे विवाद के बीच सरकार ने मीटर बदलने की प्रक्रिया पर रोक लगा दी है। तकनीकी कमेटी की रिपोर्ट आने तक अब प्रदेश में पुराने मीटर नहीं हटाए जाएंगे।

उत्तर प्रदेश में पुराने बिजली मीटरों को हटाकर स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया पर फिलहाल तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है। प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से आ रही तकनीकी शिकायतों और उपभोक्ताओं के भारी विरोध को देखते हुए शासन ने यह बड़ा कदम उठाया है।

लखनऊ सहित कई जिलों में स्मार्ट मीटर की तेज रफ्तार और गलत बिलिंग को लेकर जनता में भारी आक्रोश था, जिसके बाद यह निर्णय लिया गया।

​सरकार ने स्मार्ट मीटरों की कार्यप्रणाली की जांच के लिए एक उच्चस्तरीय तकनीकी कमेटी का गठन किया है।

​काम पर विराम: जब तक यह कमेटी अपनी विस्तृत रिपोर्ट पेश नहीं कर देती, तब तक प्रदेश में मीटर बदलने का काम पूरी तरह बंद रहेगा।

​शिकायतों का निपटारा: कमेटी यह जांच करेगी कि क्या मीटर वाकई तेज चल रहे हैं या उनमें कोई सॉफ्टवेयर संबंधी खराबी है।

​भले ही पुराने मीटरों को बदलने पर रोक लगा दी गई हो, लेकिन नए कनेक्शन लेने वालों के लिए नियम नहीं बदले हैं:

​स्मार्ट प्रीपेड मीटर: प्रदेश में अब जो भी नए बिजली कनेक्शन दिए जाएंगे, वे केवल स्मार्ट प्रीपेड मीटर के जरिए ही मिलेंगे।

​78 लाख का आंकड़ा: विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, अब तक प्रदेश में कुल 78 लाख स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं, जिनमें से 70.50 लाख स्मार्ट प्रीपेड मीटर हैं।

​उत्तर प्रदेश में बिजली मीटरों के आधुनिकीकरण का यह प्रोजेक्ट काफी समय से विवादों में रहा है। 70 लाख से ज्यादा प्रीपेड उपभोक्ता इस समय स्मार्ट मीटर तकनीक से जुड़े हुए हैं। उपभोक्ताओं का आरोप है कि मीटर लगते ही उनके बिजली खर्च में अचानक 20 से 30 फीसदी की बढ़ोतरी देखी गई है।

अब तकनीकी कमेटी की रिपोर्ट ही तय करेगी कि प्रदेश में आगे स्मार्ट मीटर लगेंगे या पुरानी व्यवस्था में ही सुधार किया जाएगा।