यूपी भारत के डिजिटल भविष्य की अगुवाई करने के लिए पूरी तरह तैयार है। नोएडा और ग्रेटर नोएडा में 3 हाइपरस्केल डेटा सेंटर पार्कों के बाद, 8 नए शहरों में 2 लाख करोड़ के निवेश के साथ नए डेटा सेंटर पार्कों के बनेंगे।

उत्तर प्रदेश ने बहुत ही कम समय में भारत के 'डेटा पावरहाउस' के रूप में अपनी पहचान स्थापित कर ली है। राज्य की सुदृढ़ डेटा सेंटर नीति का ही परिणाम है कि अब तक नोएडा और ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में तीन विशाल हाइपरस्केल डेटा सेंटर पार्क पूरी तरह से संचालित हो चुके हैं।

इसमें सबसे प्रमुख 'योटा डी1' है, जिसने उत्तर भारत में डेटा स्टोरेज की परिभाषा बदल दी है। अब तक लगभग 21,343 करोड़ रुपये का निवेश धरातल पर उतर चुका है, जिससे हज़ारों युवाओं को सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में रोजगार मिला है। सरकार ने अपने शुरुआती 250 मेगावाट क्षमता के लक्ष्य को समय से पहले ही पूरा कर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है।

इसके अलावा, नोएडा के सेक्टर-132 में जापानी कंपनी 'एनटीटी' का अत्याधुनिक डेटा सेंटर अपनी सेवाएं दे रहा है। वहीं, यमुना एक्सप्रेसवे प्राधिकरण क्षेत्र में 'वेबवर्क्स' और आयरन माउंटेन के संयुक्त प्रयास से विकसित किया गया डेटा सेंटर भी चालू हो चुका है। ये तीनों केंद्र हज़ारों करोड़ के निवेश और विश्व स्तरीय तकनीक का जीवंत उदाहरण हैं।

सरकार प्रदेश के 8 प्रमुख शहरों—लखनऊ, कानपुर, वाराणसी, प्रयागराज, गाजियाबाद, आगरा, मेरठ और नोएडा में अत्याधुनिक डेटा सेंटर पार्क विकसित करने जा रही है। इस महत्वाकांक्षी योजना के माध्यम से सरकार का लक्ष्य लगभग 2 लाख करोड़ रुपये का नया निवेश आकर्षित करना है।

यह विस्तार न केवल प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों को संतुलित डिजिटल विकास देगा, बल्कि इन शहरों को भविष्य के 'स्मार्ट एआई सिटी' के रूप में भी नई पहचान प्रदान करेगा।

​प्रशासनिक और तकनीकी स्तर पर इस कार्य को गति प्रदान करने के लिए योगी सरकार ने हाल ही में 'स्टेट डेटा सेंटर अथॉरिटी' का गठन किया है, जिसे 100 करोड़ रुपये का शुरुआती बजट आवंटित किया गया है। सरकार ने अब अपना अगला पड़ाव 900 मेगावाट बिजली की निर्बाध आपूर्ति के साथ इन नए पार्कों के संचालन को बनाया है।

बिजली विभाग को विशेष निर्देश दिए गए हैं कि इन डेटा पार्कों को समर्पित फीडर के जरिए सीधी बिजली मिले ताकि सर्वरों के संचालन में बाधा न आए। साथ ही, मुख्यमंत्री के विजन के अनुरूप इन पार्कों में सौर ऊर्जा और अन्य रिन्यूएबल एनर्जी स्रोतों के इस्तेमाल को भी अनिवार्य रूप से बढ़ावा दिया जा रहा है।

​इन डेटा सेंटर पार्कों के निर्माण और संचालन से उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था में एक नई जान आएगी। सरकार का अनुमान है कि इस पूरी परियोजना से सीधे तौर पर 50,000 से अधिक कुशल युवाओं को सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में नौकरियां मिलेंगी।

अडानी ग्रुप, एनटीटी डेटा और गूगल जैसी वैश्विक दिग्गज कंपनियां यूपी में अपनी इकाइयां स्थापित करने के लिए कतार में हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का यह विजन उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को 1 ट्रिलियन डॉलर बनाने की दिशा में सबसे मजबूत स्तंभ साबित होने जा रहा है, जो यूपी को वैश्विक निवेश और तकनीक के मानचित्र पर दुनिया के देशों के समकक्ष खड़ा कर देगा।