लखनऊ : उत्तर प्रदेश में पेट्रोल, डीजल और विशेष रूप से एलपीजी (LPG) सिलेंडरों की किल्लत और कालाबाजारी की शिकायतों पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कड़ा एक्शन लिया है।
सीएम के निर्देश के बाद पूरे प्रदेश में प्रवर्तन एजेंसियां सक्रिय हो गई हैं। 12 मार्च से शुरू हुए इस विशेष अभियान के तहत अब तक राज्य भर में 4,816 ठिकानों पर छापेमारी की गई है। इस कार्रवाई ने गैस माफियाओं और अवैध रिफिलिंग करने वालों के बीच हड़कंप मचा दिया है।
कालाबाजारी पर चौतरफा वार: 70 एफआईआर और भारी गिरफ्तारियां
प्रदेश सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, इस सघन चेकिंग अभियान के दौरान एलपीजी वितरकों और कालाबाजारी में संलिप्त व्यक्तियों के खिलाफ कुल 70 एफआईआर (FIR) दर्ज की गई हैं।
इनमें से 10 एफआईआर सीधे गैस वितरकों के खिलाफ हैं, जबकि 60 अन्य एफआईआर अवैध बिक्री और कालाबाजारी करने वाले बिचौलियों के विरुद्ध दर्ज हुई हैं। पुलिस ने मौके से 10 आरोपियों को गिरफ्तार भी किया है, जबकि 67 अन्य व्यक्तियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
24 घंटे कंट्रोल रूम और स्टॉक की नियमित समीक्षा
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि उपभोक्ताओं को बुकिंग के अनुरूप गैस सिलेंडरों की डिलीवरी हर हाल में सुनिश्चित की जाए। इसके लिए खाद्य एवं रसद विभाग ने लखनऊ स्थित खाद्य आयुक्त कार्यालय में 24 घंटे सक्रिय कंट्रोल रूम स्थापित किया है।
यहाँ अधिकारियों की ड्यूटी शिफ्ट के अनुसार लगाई गई है जो जिलों से आने वाली हर समस्या का समाधान कर रहे हैं। साथ ही, जिलों में भी कंट्रोल रूम बनाए गए हैं जो एलपीजी की उपलब्धता और वितरण की लगातार निगरानी कर रहे हैं।
कमर्शियल सिलेंडरों पर 20% का नियम और सख्त निगरानी
सरकार ने एलपीजी स्टॉक की नियमित समीक्षा के आदेश दिए हैं। केंद्र सरकार द्वारा कमर्शियल सिलेंडरों की कुल खपत के 20 प्रतिशत आवंटन की अनुमति दिए जाने के बाद, इसके क्रियान्वयन पर भी कड़ी सतर्कता बरती जा रही है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे फील्ड में रहकर स्थिति पर नजर रखें और यह सुनिश्चित करें कि घरेलू सिलेंडरों का उपयोग व्यावसायिक कार्यों में न हो। जिला आपूर्ति अधिकारी और स्थानीय प्रशासन की टीमें लगातार भ्रमण कर कालाबाजारी की संभावनाओं को खत्म करने में जुटी हैं।