लखनऊ: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की महत्वपूर्ण बैठक में प्रदेश के विकास और जनहित से जुड़े 30 बड़े प्रस्तावों को हरी झंडी दे दी गई है। इस बैठक में सबसे अहम फैसला प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को लेकर लिया गया है, जिसके तहत अब भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी रोकने के लिए किसी भी संपत्ति की रजिस्ट्री से पहले विक्रेता के नाम का मिलान खतौनी से करना अनिवार्य होगा।
यदि मिलान के दौरान नाम में कोई भी विसंगति पाई जाती है, तो रजिस्ट्रेशन विभाग तत्काल उसकी गहन जांच करेगा, ताकि फर्जीवाड़े की गुंजाइश पूरी तरह खत्म की जा सके।
ग्रामीण परिवहन में क्रांति और 59 हजार ग्राम सभाओं को तोहफा
उत्तर प्रदेश के गांवों को मुख्यधारा के परिवहन से जोड़ने के लिए कैबिनेट ने 'सीएम ग्राम परिवहन योजना 2026' को मंजूरी दे दी है। इस महात्वाकांक्षी योजना के जरिए प्रदेश की 59,163 ग्राम सभाओं को सीधे बस सेवा से जोड़ा जाएगा।
सरकार ने विशेष रूप से उन 12,200 गांवों पर ध्यान केंद्रित किया है जहाँ आजादी के बाद से अब तक सरकारी बस नहीं पहुँची थी। इन रूटों पर चलने वाली 28 सीटर बसें पूरी तरह टैक्स फ्री होंगी और निजी संचालकों को भी 10 साल के अनुबंध पर बसें चलाने की अनुमति दी जाएगी, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आवागमन दोनों को बढ़ावा मिलेगा।
शिक्षकों को कैशलेस इलाज की सौगात और शहरी आवास में राहत
शिक्षा क्षेत्र से जुड़े कर्मचारियों के लिए सरकार ने बड़ा दिल दिखाते हुए अशासकीय विद्यालयों के करीब 1.28 लाख शिक्षकों और कर्मचारियों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने का निर्णय लिया है। अब ये कर्मचारी निजी अस्पतालों में भी बिना अग्रिम भुगतान के अपना इलाज करा सकेंगे, जिसका प्रीमियम सरकार स्वयं वहन करेगी।
इसके साथ ही प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकानों की लागत सीमा को 6 लाख से बढ़ाकर 9 लाख रुपये कर दिया गया है, जिससे अब 30 वर्गमीटर के बेहतर मकानों का निर्माण संभव होगा। केंद्र और राज्य सरकार मिलकर इस मद में प्रति आवास 2.5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान करेंगी।
सरकारी कर्मचारियों के निवेश पर सख्ती और ओला-उबर के लिए नई नीति
प्रशासनिक पारदर्शिता को मजबूत करने के लिए कैबिनेट ने सरकारी कर्मचारियों की सेवा नियमावली में कड़ा संशोधन किया है। अब प्रत्येक कर्मचारी को हर साल अपनी अचल संपत्ति की घोषणा करनी होगी और यदि वे अपने मूल वेतन के 6 महीने से अधिक की राशि का कहीं भी निवेश करते हैं, तो इसकी जानकारी विभाग को देना अनिवार्य होगा।
परिवहन विभाग के मोर्चे पर भी सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए ओला और उबर जैसे एग्रीगेटर प्लेटफॉर्म के लिए पंजीकरण अनिवार्य कर दिया है। इन कंपनियों को अब 5 लाख रुपये की लाइसेंस फीस देनी होगी और उनके ड्राइवरों का पुलिस वेरिफिकेशन व मेडिकल टेस्ट अनिवार्य रूप से कराया जाएगा।