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​बसपा प्रमुख ने सदन के भीतर विपक्षी दलों द्वारा किए गए हंगामे और 'गो-बैक' के नारों को जनता के असंतोष का प्रतिबिंब बताया। उन्होंने कहा कि जब सरकार सदन और सड़क दोनों जगहों पर जनता की आवाज सुनने को तैयार नहीं होती, तो ऐसे विरोध स्वाभाविक हैं।

लखनऊ : उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और बसपा सुप्रीमो मायावती ने विधानसभा में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के अभिभाषण को निराशाजनक बताया है।

उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि राज्यपाल का संबोधन पूरी तरह से सरकार द्वारा प्रायोजित था और इसमें आम जनता की समस्याओं के समाधान की कोई ठोस रूपरेखा नहीं दिखी।

​जनसमस्याओं की अनदेखी का लगाया आरोप

​मायावती ने कहा कि राज्यपाल के अभिभाषण में प्रदेश की गंभीर समस्याओं जैसे बेरोजगारी, गरीबी, महंगाई और किसानों की बदहाली पर कोई जोर नहीं दिया गया है।

उनके अनुसार, सरकार ने राज्यपाल के माध्यम से अपनी पीठ थपथपाने की कोशिश की है, जबकि जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि सरकार केवल कागजों पर विकास दिखा रही है, जिसका लाभ गरीब और पिछड़े वर्गों तक नहीं पहुँच रहा है।

​कानून-व्यवस्था के दावों पर सवाल

​अभिभाषण में बेहतर कानून-व्यवस्था के दावों पर सवाल उठाते हुए मायावती ने कहा कि उत्तर प्रदेश में दलितों, पिछड़ों और महिलाओं के खिलाफ अपराधों में कोई कमी नहीं आई है।

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार न्याय देने के बजाय केवल प्रचार-प्रसार में जुटी है। उनके मुताबिक, राज्यपाल का संबोधन उन संवैधानिक परंपराओं का महज औपचारिक निर्वहन था, जिसमें सरकार अपनी विफलताओं को छिपाने का प्रयास करती है।

​सदन में विपक्ष के हंगामे को बताया जनता का गुस्सा

​बसपा प्रमुख ने सदन के भीतर विपक्षी दलों द्वारा किए गए हंगामे और 'गो-बैक' के नारों को जनता के असंतोष का प्रतिबिंब बताया। उन्होंने कहा कि जब सरकार सदन और सड़क दोनों जगहों पर जनता की आवाज सुनने को तैयार नहीं होती, तो ऐसे विरोध स्वाभाविक हैं। मायावती ने मांग की कि सरकार केवल आंकड़ों का मायाजाल न फैलाए बल्कि बजट में जनहित के वास्तविक कार्यों को प्राथमिकता दे।

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