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लखनऊ : उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने आज विधानसभा में वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट पेश करते हुए प्रदेश की एक नई और सशक्त आर्थिक तस्वीर पेश की है। वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बजट भाषण के दौरान आंकड़ों के जरिए बताया कि कैसे पिछले कुछ वर्षों में उत्तर प्रदेश ने गरीबी उन्मूलन और नागरिकों की औसत आय बढ़ाने में ऐतिहासिक सफलता हासिल की है। यह बजट न केवल विकास का रोडमैप है, बल्कि सरकार के पिछले कार्यों का एक प्रभावशाली 'इकोनॉमिक रिपोर्ट कार्ड' भी है।

​6 करोड़ लोगों को गरीबी रेखा से बाहर निकाला

​बजट का सबसे महत्वपूर्ण और मानवीय पहलू यह रहा कि सरकार के प्रयासों से प्रदेश के लगभग 6 करोड़ लोग बहुआयामी गरीबी से बाहर निकलने में सफल रहे हैं। सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं, मुफ्त राशन, आवास और रोजगार अभियानों के संगम ने प्रदेश के एक बड़े तबके को गरीबी के जाल से मुक्त कर मुख्यधारा में शामिल किया है।

​प्रति व्यक्ति आय में रिकॉर्ड बढ़ोतरी

​वित्त मंत्री ने जानकारी दी कि वर्ष 2016-17 में प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय जो मात्र 54,564 रुपये थी, वह अब दो गुने से भी अधिक बढ़कर 1,09,844 रुपये हो गई है। यह उपलब्धि दर्शाती है कि प्रदेश में आर्थिक गतिविधियां बढ़ी हैं और लोगों की क्रय शक्ति में सुधार हुआ है। आगामी वर्ष 2025-26 के लिए इसे 1,20,000 रुपये तक पहुँचाने का लक्ष्य रखा गया है।

​बेरोजगारी दर में ऐतिहासिक गिरावट

​आर्थिक आंकड़ों को साझा करते हुए वित्त मंत्री ने बताया कि प्रदेश में बेरोजगारी की दर अब घटकर मात्र 2.24 प्रतिशत रह गई है। सरकारी और निजी क्षेत्रों में रोजगार सृजन के साथ-साथ स्वरोजगार को बढ़ावा देने वाली नीतियों के कारण यूपी ने श्रम बाजार में अपनी स्थिति काफी मजबूत की है।

​30.25 लाख करोड़ की हुई उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था

​उत्तर प्रदेश की जीडीपी (GSDP) अब 30.25 लाख करोड़ रुपये आकलित की गई है। इसमें पिछले वर्ष की तुलना में 13.4 प्रतिशत की शानदार वृद्धि दर्ज की गई है। यह विकास दर भारत की औसत विकास दर से भी अधिक है, जो यूपी को देश का 'ग्रोथ इंजन' बनाने की दिशा में एक निर्णायक कदम है।

​SDG इंडिया इंडेक्स में 11 पायदान की छलांग

​सतत विकास लक्ष्यों के मामले में भी प्रदेश ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है। वर्ष 2018-19 में यूपी इस इंडेक्स में 29वें स्थान पर था, लेकिन ताजा आंकड़ों के अनुसार 11 पायदान चढ़कर अब 18वें स्थान पर आ गया है। यह सुधार स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर में हुए बदलावों का परिणाम है।

किसानों और ग्रामीण खुशहाली पर जोर

​सरकार ने सिंचित क्षेत्र में 60 लाख हेक्टेयर की बढ़ोतरी कर इसे 2.76 करोड़ हेक्टेयर तक पहुँचा दिया है। साथ ही फसल सघनता में भी भारी सुधार हुआ है। कृषि क्षेत्र में इस प्रगति ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ को मजबूत किया है, जिससे गावों में रहने वाली आबादी की आय में प्रत्यक्ष वृद्धि हुई है।