उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने बांग्लादेश से विस्थापित 331 हिंदू परिवारों को लखीमपुर खीरी जिले में स्थायी रूप से बसाने का ऐतिहासिक कार्य पूरा कर लिया है। इन परिवारों को आवास और जीविकोपार्जन के लिए कृषि भूमि भी आवंटित की गई है।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कुशल नेतृत्व में राज्य सरकार ने एक और बड़ा मानवीय कार्य संपन्न किया है। बांग्लादेश (तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान) से वर्ष 1970 में विस्थापित होकर भारत आए 331 हिंदू परिवारों को लखीमपुर खीरी जिले में स्थायी रूप से बसाया गया है।

ये परिवार पिछले पांच दशकों से अधिक समय से पुनर्वास का इंतजार कर रहे थे। इन परिवारों को 'मुख्यमंत्री आवास योजना' के तहत पक्के मकान और बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं, जिससे उनके जीवन में स्थिरता आई है।

​कृषि भूमि और आवास के साथ आर्थिक स्वावलंबन की पहल 
पुनर्वास योजना के अंतर्गत, विस्थापित परिवारों को केवल रहने के लिए घर ही नहीं, बल्कि उनके आर्थिक स्वावलंबन के लिए जीविकोपार्जन के साधन भी प्रदान किए गए हैं। लखीमपुर खीरी की पलिया तहसील के भैंसाही, राना नगर, और गोबरौला गांवों में इन परिवारों को कृषि कार्य के लिए भूमि आवंटित की गई है।

प्रत्येक परिवार को आवास निर्माण के लिए जमीन के साथ-साथ खेती के लिए भी पर्याप्त कृषि भूमि का पट्टा सौंपा गया है, जिससे वे आत्मनिर्भर बन सकें। इस कदम से न केवल इन परिवारों को सम्मानजनक जीवन मिला है, बल्कि क्षेत्र की कृषि गतिविधियों में भी योगदान मिलने की उम्मीद है।

​मुख्यमंत्री ने विस्थापितों को दीं सुख-समृद्धि की शुभकामनाएं 
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि 54 वर्षों का लंबा संघर्ष आज समाप्त हुआ है। उन्होंने इन परिवारों के धैर्य और विश्वास की सराहना की। मुख्यमंत्री ने विस्थापितों को भारत की सुख-समृद्धि और विकास में भागीदार बनने की शुभकामनाएं दीं।

सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि इन परिवारों को शिक्षा, स्वास्थ्य, और बिजली जैसी बुनियादी सरकारी योजनाओं का पूरा लाभ मिले। पुनर्वास प्रक्रिया को पारदर्शी और सुचारू रूप से संपन्न कराने के लिए जिला प्रशासन और पुनर्वास विभाग ने रात-दिन काम किया, जिसे मुख्यमंत्री ने भी सराहा।

​लखीमपुर खीरी जिला प्रशासन ने पूरी की पुनर्वास की जटिल प्रक्रिया 
लखीमपुर खीरी के जिलाधिकारी और पलिया तहसील के एसडीएम की देखरेख में विस्थापितों के पुनर्वास की पूरी प्रक्रिया संपन्न हुई। जिला प्रशासन ने भूमि चिन्हित करने से लेकर, परिवारों के सत्यापन और आवंटन पत्र सौंपने तक की जटिल कार्रवाई को समयबद्ध तरीके से पूरा किया। आवंटित भूमि पर इन परिवारों ने अब खेती और आवास निर्माण का काम शुरू कर दिया है।

प्रशासन ने यह भी सुनिश्चित किया है कि विस्थापित परिवारों को राशन कार्ड, आधार कार्ड, और अन्य महत्वपूर्ण सरकारी दस्तावेज भी प्राथमिकता के आधार पर उपलब्ध कराए जाएं, जिससे उन्हें देश के मुख्यधारा में शामिल होने में कोई कठिनाई न हो।