लखनऊ: लखनऊ की प्रतिष्ठित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी एक बार फिर सुर्खियों में है, दरसल लंबे समय से चल रहे विवाद और कानूनी दांव-पेंच के बाद, अब केजीएमयू प्रशासन और जिला प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि परिसर के भीतर किसी भी तरह का अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
विशेष रूप से मजारों के निर्माण को लेकर दी गई सभी समय-सीमाएं अब समाप्त हो चुकी हैं। प्रशासन का कहना है कि यह कदम चिकित्सा संस्थान की गरिमा और वहां आने वाले हजारों मरीजों की सुविधा को ध्यान में रखकर उठाया जा रहा है।
हाईकोर्ट का आदेश और 15 दिन की अंतिम समय-सीमा
इस पूरे मामले की जड़ें कानूनी लड़ाई में छिपी हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने पहले ही सार्वजनिक स्थानों और शिक्षण संस्थानों से अवैध धार्मिक ढांचों को हटाने के निर्देश दिए थे। केजीएमयू प्रशासन ने इस आदेश के पालन के लिए संबंधित पक्षों को कई बार नोटिस जारी किए और मोहलत भी दी।
अब प्रशासन ने अंतिम चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि अगले 15 दिनों के भीतर इन मजारों को हटा लिया जाए। यदि तय समय के भीतर अतिक्रमण नहीं हटाया गया, तो प्रशासन पुलिस बल के सहयोग से स्वयं कार्रवाई करेगा और इसका खर्च भी संबंधित पक्षों से वसूला जा सकता है।
सुरक्षा व्यवस्था और संवेदनशीलता का पूरा ध्यान
चूंकि मामला धार्मिक संवेदनाओं से जुड़ा है, इसलिए लखनऊ पुलिस और प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। केजीएमयू परिसर और आसपास के इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके। खुफिया एजेंसियां भी सक्रिय हैं और सोशल मीडिया पर नजर रखी जा रही है।
प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई पूरी तरह से निष्पक्ष और कानूनी दायरे में होगी। यूनिवर्सिटी के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि अस्पताल परिसर में मरीजों और एम्बुलेंस के आवागमन में इन ढांचों के कारण बाधा आ रही थी, जिसे दूर करना संस्थान की प्राथमिकता है।
मरीजों की सुविधा और विकास कार्यों के लिए जरूरी कदम
केजीएमयू के विस्तार और वहां नए चिकित्सा ब्लॉक बनाने की योजना में ये अतिक्रमण बाधा बन रहे थे। प्रशासन के अनुसार, कई मजारें ऐसी जगहों पर विकसित हो गई थीं जहां भविष्य में महत्वपूर्ण चिकित्सा सुविधाएं प्रस्तावित हैं। इस कार्रवाई के बाद परिसर में खाली होने वाली जमीन का उपयोग मरीजों के वेटिंग एरिया या अन्य स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए किया जाएगा।