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Lathmar Holi in Barsana: उत्तर प्रदेश के बृज मंडल में इन दिनों होली की धूम है। चेहरे पर घूंघट...हाथ में लट्ठ और गली-चौबारों पर रंग-गुलाल की बारिश का यह माहौल देख हर कोई झूम उठता है। गोकुल-मथुरा और वृंदावन के लोग ही नहीं, बल्कि लाखों की संख्या में टूरिस्ट भी होली के इस उत्सव से सराबोर दिखे। मंगलवार को दम घुटने से एक श्रद्धाालु की मौत हो गई।
मथुरा के बरसाने में सोमवार को भी रंग-गुलाल की धूम रही। श्रीजी मंदिर 10 क्विंटल से ज्यादा रंग-गुलाल और 1500 लीटर ठंडाई की व्यवस्था की गई थी। राधा बनीं हुरियारिनों ने दो घंटे तक हुरियारों पर लट्ठ बरसाई। हुरियार भी गीत गाते हुए बचाव करते रहे। प्रशासन ने बिहारी जू के भक्तों पर हेलीकाफ्टर से फूलों की वर्षा की।
मुंबई से 40 श्रद्धालुओं की आई टोली
वृंदावन के बांकेबिहारी मंदिर के गेट-1 के पास मंगलवार को भीड़ के बीच मुंबई से आए श्रद्धालु सुनील पिशोरी लाल की तबीयत बिगड़ गई। बेहोशी हालत में उसे अस्पताल ले जाया गया, डॉक्टर ने मृत घोषित कर दिया। श्रद्धालु 40 लोगों के साथ वृंदावन दर्शन के लिए आया था। सभी लोग लोई बाजार स्थित बसंती धर्मशाला में ठहरे हुए थे। मंगलवार सुबह बांके बिहारी मंदिर में दर्शन कर रहे थे, तभी सुनील अचेत होकर गिर पड़ा।
ब्रज में होली की खासियत
- ब्रज की होली दुनियाभर में चर्चित है। यहां जिस जोश और उमंग के साथ होली खेली जाती है, वैसा उल्लास और कहीं नहीं रहता। रंग-गुलाल और फूलों के अलावा यहां लोग कीचड़ की होली भी खेलते हैं। बरसाने की लट्ठमार और लड्डूमार होली के चर्चे हर जगह होते हैं।
- ब्रज मंडल में होली की शुरुआत वसंत पंचमी के साथ शुरू हो जाती है। और सवा महीने तक खेली जाती है। वृंदावन, बरसाना, नंदगांव और दाऊ दी की होली देखने लोग दूर दूराज प्रांतों से आते हैं।
- बरसाने में रंगों से पहले लठमार होली खेली जाती है। इसमें महिलाएं पुरुषों पर लाठी बरसाती हैं। लोग बुरा भी नहीं मानते और खुशी से इस रस्म का आनंद लेते हैं। इसे राधा-कृष्ण के प्रेम प्रतीक के तौर पर देखा जाता है।
- ब्रज में 18 मार्च 2024 को लट्ठमार होली खेली गई। इसमें गोपियां बनी महिलाएं नंदगांव से आए पुरुषों पर लट्ठ बरसती हैं और पुरुष ढाल से बचाव करते हैं। बरसाने के बाद 19 मार्च को नंद गांव में लट्ठमार होली खेली गई।
- गोकुल में लाठी की बजाय छड़ीमार होली खेली जाती है। यहां कान्हा की पालकी सजाई जाती है। गोपियां सज-धज कर हाथों में छड़ी लेकर पीछे-पीछे चलती हैं। और होली खेलने आए कान्हाओं पर छड़ी बरसाती हैं।
- होलिका दहन के दूसरे दिन पूरे देश में धुलेडी मनाई जाती है। लोग एक-दूसरे को रंग-गुलाल लगाते हैं। मथुरा के द्वारकाधीश मंदिर में भी खास उत्सव होता है। बलदेव और दाऊजी मंदिर में धूलेड़ी के दूसरे दिन हुरंगा मनाते है। आसपास के लोग होली खेलते और फाग गाते हैं।
- बरसाने की लठमार होली को लेकर मान्यता है कि इससे शारीरिक पीड़ा दूर होती है। कहते हैं ब्रज भूमि पर पड़ा गुलाल दवा का काम करता है। इसे लगाने न सिर्फ दर्द, बल्कि शरीर में लगी चोंट भी ठीक हो जाती है।
