रमजान और होली को देखते हुए मजारों को हटाने की समय सीमा बढ़ाकर 4 अप्रैल कर दी गई है। मजार कमेटियों को 28 फरवरी तक कुलसचिव के सामने पेश होकर अपने दस्तावेज दिखाने का आखिरी मौका दिया गया है।

लखनऊ : लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) परिसर में बनी अवैध मजारों को हटाने की प्रस्तावित कार्रवाई को फिलहाल टाल दिया गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने रमजान और होली के त्योहार को देखते हुए मजार कमेटियों को दी गई समय सीमा बढ़ाकर 4 अप्रैल 2026 कर दी है। प्रशासन का मानना है कि त्योहारों के समय शांति व्यवस्था बनाए रखना प्राथमिकता है, इसलिए कमेटियों को अपना पक्ष रखने के लिए अतिरिक्त समय दिया गया है।

​कमेटियों को 28 फरवरी तक पेश होने का अंतिम निर्देश

​कार्रवाई को भले ही 4 अप्रैल तक टाला गया है, लेकिन प्रशासनिक प्रक्रिया तेज कर दी गई है। KGMU प्रशासन ने एक नया नोटिस चस्पा कर संबंधित मजार कमेटियों को 28 फरवरी 2026 तक कुलसचिव के समक्ष उपस्थित होने का कड़ा निर्देश दिया है। इस दौरान कमेटियों को मजारों के अस्तित्व से जुड़े वैध साक्ष्य और दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे। इससे पहले जारी किए गए नोटिस पर अधिकांश कमेटियों द्वारा कोई जवाब न देना प्रशासन ने गंभीरता से लिया है।

​1947 से पहले का दावा और दस्तावेजों की जांच

​परिसर में स्थित कुल छह मजारों में से न्यू ऑर्थोपेडिक परिसर स्थित मजार की कमेटी ने अपना लिखित जवाब सौंप दिया है। इस कमेटी का दावा है कि यह मजार 1947 से पहले की है और इसके पास ऐतिहासिक साक्ष्य मौजूद हैं। प्रशासन अब इन दावों की बारीकी से जांच कर रहा है। अन्य पांच मजारों के संबंध में अब तक कोई ठोस दस्तावेज पेश नहीं किए गए हैं, जिसे प्रशासन 'असहयोग' की श्रेणी में रख रहा है।

​सार्वजनिक भूमि और सुरक्षा के कड़े इंतजाम

​विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी सार्वजनिक संस्थान की भूमि पर अवैध ढांचा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि 4 अप्रैल तक संतोषजनक दस्तावेज नहीं मिलते हैं, तो नियमानुसार मजारों को हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। गौरतलब है कि पूर्व में मजारों के पास से अतिक्रमण हटाने के दौरान काफी बवाल हुआ था, जिसमें डॉक्टरों के साथ मारपीट की घटनाएं भी हुई थीं। इसको देखते हुए इस बार प्रशासन फूँक-फूँक कर कदम रख रहा है।