लखनऊ : उत्तर प्रदेश विधानमंडल के बजट सत्र का आगाज आज हंगामेदार रहा। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल जैसे ही दोनों सदनों की संयुक्त बैठक को संबोधित करने के लिए सदन में पहुंचीं, विपक्ष ने जोरदार विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। विपक्षी सदस्यों ने 'राज्यपाल वापस जाओ' के नारे लगाए और कागज के गोले फेंककर अपना विरोध दर्ज कराया।
विपक्ष का शोर और राज्यपाल का संबोधन
सदन की कार्यवाही शुरू होते ही समाजवादी पार्टी और अन्य विपक्षी दलों के सदस्य वेल में आ गए। विपक्ष ने बेरोजगारी, महंगाई और किसानों के मुद्दों को लेकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। इस दौरान विपक्षी सदस्य हाथों में तख्तियां लेकर राज्यपाल के अभिभाषण में बाधा डालते रहे और 'गो-बैक' के नारे लगाते रहे। हालांकि, इस भारी शोर-शराबे के बीच भी राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने अपना अभिभाषण जारी रखा।
अभिभाषण के मुख्य बिंदु: विकास और कानून व्यवस्था पर जोर
राज्यपाल ने अपने संबोधन में योगी सरकार द्वारा पिछले वर्षों में किए गए कार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश आज देश की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर है।
राज्यपाल ने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण, बेहतर कानून व्यवस्था, और महिलाओं की सुरक्षा के लिए उठाए गए कदमों का उल्लेख किया। उन्होंने सदन को बताया कि प्रदेश में निवेश का माहौल बना है और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित हुए हैं।
सरकारी योजनाओं का उल्लेख
अभिभाषण के दौरान राज्यपाल ने 'मुफ्त राशन योजना', 'आयुष्मान भारत' और 'प्रधानमंत्री आवास योजना' जैसी जनकल्याणकारी योजनाओं की प्रगति रिपोर्ट पेश की। उन्होंने कहा कि सरकार समाज के हर वर्ग, विशेषकर गरीबों, पिछड़ों और वंचितों के उत्थान के लिए प्रतिबद्ध है।
राज्यपाल ने प्रदेश में एक्सप्रेस-वे के जाल और कनेक्टिविटी में हुए सुधारों को भी अपनी सरकार की बड़ी उपलब्धि बताया।
सदन की गरिमा और सुरक्षा
विपक्ष के हंगामे को देखते हुए सदन में सुरक्षा के बेहद कड़े प्रबंध किए गए थे। विधानसभा अध्यक्ष ने कई बार सदस्यों से शांत रहने और राज्यपाल के सम्मान में अभिभाषण सुनने की अपील की, लेकिन विपक्ष का विरोध जारी रहा। करीब एक घंटे तक चले इस संबोधन के बाद राज्यपाल सदन से निकल गई, जिसके बाद सदन की कार्यवाही को अगले सत्र के लिए स्थगित कर दिया गया।










