लखनऊ : उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा जारी आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के आंकड़े प्रदेश की बदलती स्वास्थ्य व्यवस्था की एक सुखद तस्वीर पेश करते हैं। सर्वेक्षण के अनुसार, राज्य में चिकित्सा ढांचे को मजबूत करने के लिए किए गए भारी निवेश का परिणाम अब धरातल पर दिखने लगा है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों से लेकर मेडिकल कॉलेजों तक की श्रृंखला ने आमजन के लिए इलाज को सुलभ और सस्ता बना दिया है।

​स्वास्थ्य पर होने वाले व्यक्तिगत खर्च (OOPE) में बड़ी गिरावट

​आर्थिक सर्वेक्षण की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि स्वास्थ्य पर होने वाले 'आउट ऑफ पॉकेट एक्सपेंडिचर' में कमी आना है।

सरकारी अस्पतालों में मुफ्त दवाओं, जांच सुविधाओं और आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से अब गरीब और मध्यम वर्ग को इलाज के लिए अपनी जमा-पूंजी खर्च नहीं करनी पड़ रही है। सर्वे बताता है कि अब लोग निजी अस्पतालों के बजाय सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर अधिक भरोसा जता रहे हैं।

​हर जिले में मेडिकल कॉलेज के लक्ष्य की ओर बढ़ते कदम

​प्रदेश सरकार का 'एक जिला, एक मेडिकल कॉलेज' का संकल्प अब पूर्णता की ओर है। सर्वे के मुताबिक, पिछले कुछ वर्षों में एमबीबीएस और पीजी सीटों की संख्या में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई है।

नए मेडिकल कॉलेजों के खुलने से न केवल स्थानीय स्तर पर विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ी है, बल्कि गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए अब मरीजों को बड़े शहरों या दूसरे राज्यों की दौड़ नहीं लगानी पड़ती।

​ग्रामीण और शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों का सुदृढ़ीकरण

​मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर को केवल बड़े अस्पतालों तक सीमित न रखकर, सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों के हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर्स पर भी ध्यान केंद्रित किया है।

सर्वे के अनुसार, दूर-दराज के इलाकों में टेली-कंसल्टेशन और डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार से स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच अंतिम व्यक्ति तक सुनिश्चित हुई है। केंद्रों पर आधुनिक उपकरणों और पर्याप्त पैरामेडिकल स्टाफ की तैनाती ने बुनियादी ढांचे को नई मजबूती दी है।

​आयुष्मान भारत और अन्य जन-कल्याणकारी योजनाओं का प्रभाव

​सर्वेक्षण में आयुष्मान भारत - प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PM-JAY) के सफल कवरेज का विशेष उल्लेख किया गया है। करोड़ों परिवारों को मिले 5 लाख रुपये तक के मुफ्त इलाज के सुरक्षा कवच ने स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति सामाजिक दृष्टिकोण को बदला है।

इसके अलावा, मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर में आई गिरावट भी इस बात का प्रमाण है कि प्रदेश का स्वास्थ्य ढांचा पहले के मुकाबले अधिक संवेदनशील और सक्षम हुआ है।