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ऑपरेशन सिंदूर' में सफल रही 'द्रोणम' एंटी-ड्रोन गन का निर्माण अब झांसी डिफेंस कॉरिडोर में किया जाएगा। यह गन 3 किमी तक के ड्रोन्स को जैम कर सकती है। इसके निर्माण से झांसी रक्षा क्षेत्र का नया केंद्र बनेगा।

झांसी : उत्तर प्रदेश का झांसी अब केवल अपनी ऐतिहासिक वीरता के लिए ही नहीं, बल्कि आधुनिक सैन्य साजो-सामान के निर्माण के लिए भी दुनिया भर में अपनी पहचान बनाने जा रहा है। 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान अपनी अचूक मारक क्षमता से चर्चा में आई स्वदेशी एंटी-ड्रोन गन 'द्रोणम' का बड़े पैमाने पर उत्पादन अब झांसी डिफेंस कॉरिडोर में शुरू होने जा रहा है। यह कदम 'मेक इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान के तहत सुरक्षा बलों को अभेद्य सुरक्षा कवच प्रदान करेगा।

​क्या है 'ऑपरेशन सिंदूर' और द्रोणम का कनेक्शन?

​'द्रोणम' एंटी-ड्रोन गन पहली बार तब सुर्खियों में आई थी जब इसे एक विशेष सुरक्षा अभियान 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान इस्तेमाल किया गया था। इस ऑपरेशन में इस गन ने दुश्मन के जासूसी ड्रोन्स को पलक झपकते ही जाम कर उन्हें निष्क्रिय कर दिया था।

इसकी सफलता को देखते हुए भारतीय सेना और अर्धसैनिक बलों ने इसमें गहरी रुचि दिखाई है, जिसके बाद अब इसका निर्माण झांसी में स्थित रक्षा इकाई में करने का निर्णय लिया गया है।

​'द्रोणम' की प्रमुख खासियतें

​यह एंटी-ड्रोन गन आधुनिक तकनीक का बेजोड़ नमूना है। इसकी कुछ प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार हैं:

सटीक जैमिंग तकनीक: यह गन रेडियो फ्रीक्वेंसी और जीपीएस सिग्नल को जाम कर देती है, जिससे दुश्मन का ड्रोन ऑपरेटर से संपर्क खो देता है और या तो क्रैश हो जाता है या वापस लौट जाता है।

मारक क्षमता: यह 2 से 3 किलोमीटर की सीमा के भीतर किसी भी छोटे या मध्यम आकार के ड्रोन को मार गिराने में सक्षम है।

पोर्टेबिलिटी: इसे एक सैनिक आसानी से अपने कंधे पर रखकर चला सकता है, जिससे दुर्गम इलाकों और सीमावर्ती क्षेत्रों में इसकी उपयोगिता बढ़ जाती है।

स्वदेशी सॉफ्टवेयर: इसमें लगा सॉफ्टवेयर पूरी तरह भारतीय इंजीनियरों द्वारा विकसित किया गया है, जो विदेशी हैकिंग के खतरे से सुरक्षित है।

​झांसी डिफेंस कॉरिडोर को मिलेगी नई रफ्तार

​झांसी में 'द्रोणम' के निर्माण से न केवल स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे, बल्कि यह उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (UPDIC) के लिए एक मील का पत्थर साबित होगा। इस इकाई में हर साल सैकड़ों की संख्या में एंटी-ड्रोन गन बनाने का लक्ष्य रखा गया है। इससे भारत की विदेशों पर निर्भरता कम होगी और हम रक्षा निर्यात के क्षेत्र में भी आगे बढ़ सकेंगे।

​ड्रोन खतरों से मिलेगी सुरक्षा

​हाल के वर्षों में सीमा पार से ड्रोन्स के जरिए ड्रग्स और हथियारों की तस्करी की घटनाएं बढ़ी हैं। ऐसे में 'द्रोणम' जैसी स्वदेशी गन सीमा सुरक्षा बल और पुलिस के लिए एक बड़ा हथियार साबित होगी। झांसी में इसका उत्पादन शुरू होना भारत की सुरक्षा तैयारियों को नई मजबूती प्रदान करेगा।

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