अयोध्या के सरयू तट स्थित राजघाट पर 1251 कुंडीय लक्ष्मी नारायण महायज्ञ में भीषण आग लग गई। हजारों श्रद्धालुओं में भगदड़ मच गई। मौके पर मंत्री दयाशंकर सिंह और फायर ब्रिगेड की टीम रेस्क्यू में जुटी, कारणों की जांच जारी।

धर्म नगरी अयोध्या से एक बड़ी और दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। सरयू तट के राजघाट क्षेत्र में चल रहे भव्य 1251 कुंडीय श्री लक्ष्मी नारायण महायज्ञ के दौरान अचानक भीषण आग भड़क उठी, जिसने देखते ही देखते पूरे यज्ञ पंडाल को अपनी चपेट में ले लिया।

हजारों श्रद्धालुओं की मौजूदगी में मची अफरा-तफरी ने हालात को और गंभीर बना दिया। मौके पर मौजूद प्रशासन, फायर ब्रिगेड और जनप्रतिनिधि राहत और बचाव कार्य में जुटे हैं, जबकि इस हादसे ने धार्मिक उत्सव के माहौल को मातम में बदल दिया।

​यज्ञशाला में लगी आग और बचाव कार्य
अयोध्या के बाटी वाले बाबा घाट के पास स्थित राजघाट पर 1251 कुंडीय श्री लक्ष्मी नारायण महायज्ञ का आयोजन 20 मार्च से चल रहा था। आज दोपहर अचानक यज्ञशाला के एक हिस्से में आग की लपटें दिखाई दीं, जिसने देखते ही देखते विकराल रूप धारण कर लिया। चूँकि यज्ञशाला और आसपास का पंडाल सूखी घास, फूस और लकड़ी से बना था, इसलिए आग तेजी से फैल गई।

दमकल की चार से अधिक गाड़ियां लगातार आग को बुझाने का प्रयास कर रही हैं। फायर ब्रिगेड की रेस्क्यू टीम मुस्तैदी से लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने और संपत्ति के नुकसान को कम करने में जुटी हुई है।

​परिवहन मंत्री और विधायक मौके पर मौजूद
इस महायज्ञ के संयोजक और उत्तर प्रदेश सरकार के परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह स्वयं कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे थे। आग लगने के समय वे यज्ञ स्थल पर ही मौजूद थे। उनके साथ गोसाईगंज के विधायक अभय सिंह भी मौके पर पहुँचे और स्थिति का जायजा लिया।

परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि प्राथमिकता के आधार पर श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए और आग लगने के कारणों की गहनता से जांच की जाए। उन्होंने स्वयं बचाव कार्यों की निगरानी करते हुए प्रशासन को हर संभव सहायता के निर्देश दिए हैं।

​जीयर जी महाराज के सान्निध्य में हो रहा था महायज्ञ 
यह भव्य आयोजन संत त्रिदण्डी स्वामी के शिष्य पूज्य जीयर स्वामी जी महाराज के नेतृत्व में किया जा रहा था, जिसमें उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड से हजारों श्रद्धालु शामिल होने आए थे। यज्ञ के दौरान प्रतिदिन धार्मिक प्रवचन और 1251 कुंडों में आहुति का कार्यक्रम चल रहा था। आज 28 मार्च को इस महायज्ञ की पूर्णाहूति होनी थी, लेकिन इस दुखद घटना ने उत्सव के माहौल में खलल डाल दिया है।

श्रद्धालु स्वामी जी और अन्य संतों की सुरक्षा को लेकर भी चिंतित हैं, हालांकि शुरुआती रिपोर्ट्स के अनुसार संतों और मुख्य यजमानों को सुरक्षित स्थान पर पहुँचा दिया गया है।

​आग लगने के कारणों की जांच और प्रशासन की सतर्कता 
फिलहाल आग लगने के सटीक कारणों का पता नहीं चल सका है, लेकिन माना जा रहा है कि शॉर्ट सर्किट या हवन कुंड की चिंगारी इस भीषण आग की वजह हो सकती है। अयोध्या प्रशासन और पुलिस बल मौके पर भीड़ को नियंत्रित करने और यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने में जुटे हैं।

राजघाट जाने वाले रास्तों पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है ताकि दमकल की गाड़ियों को आने-जाने में कोई बाधा न हो। जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी पल-पल की रिपोर्ट ले रहे हैं। गनीमत यह रही कि अब तक किसी जनहानि की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन पंडाल को काफी नुकसान पहुँचा है।