भोपाल/वाराणसी। देश की सांस्कृतिक राजधानी मानी जाने वाली वाराणसी में 3 से 5 अप्रैल के बीच एक भव्य ऐतिहासिक महानाट्य ‘सम्राट विक्रमादित्य’ का आयोजन किया गया। इस तीन दिवसीय प्रस्तुति ने दर्शकों को प्राचीन भारत के गौरवशाली इतिहास से रूबरू कराया। मध्यप्रदेश संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम को 60 हजार से अधिक लोगों ने देखा, जो अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
भव्य मंचन ने खींचा लोगों का ध्यान
महानाट्य के लिए विशाल सेट तैयार किया गया था, जिसमें प्राचीन किलों और राजमहलों का स्वरूप उकेरा गया। ऊंची दीवारें, दरबार और युद्ध के दृश्य इतने सजीव लगे कि दर्शक खुद को उस दौर में महसूस करने लगे। लाइट और साउंड इफेक्ट्स ने पूरे वातावरण को और भी प्रभावशाली बना दिया। दर्शक राजसी वैभव को देखकर उत्साह से भर गए।
लोगों ने विक्रमादित्य के न्याय को सराहा
इस प्रस्तुति में 200 से अधिक कलाकारों ने हिस्सा लिया और अपने अभिनय से इतिहास को जीवंत कर दिया। उन्होंने सम्राट विक्रमादित्य के जीवन के विभिन्न पहलुओं को मंच पर उतारा, जिसमें उनके साहस, न्यायप्रियता और नेतृत्व को दिखाया गया। कलाकारों की ऊर्जा और समर्पण ने दर्शकों को अंत तक बांधे रखा।
जानवरों के उपयोग से बढ़ा रोमांच
मंचन के दौरान हाथी, घोड़े और ऊंट जैसे जीवंत तत्वों का इस्तेमाल किया गया, जिससे दृश्य और अधिक आकर्षक बन गए। घोड़ों की दौड़ और हाथियों की आवाज ने युद्ध के दृश्यों को वास्तविकता के करीब ला दिया। इसने दर्शकों में उत्साह और रोमांच को कई गुना बढ़ा दिया। नाटक में कुछ ऐसे दृश्य भी शामिल थे, जिन्होंने दर्शकों को भावुक कर दिया। विशेष रूप से वे क्षण, जब सम्राट आम जनता का हाल जानने के लिए वेश बदलकर निकलते हैं, लोगों के दिल को छू गए।
सीएम योगी व डॉ. यादव ने किया शुभारंभ
इस भव्य आयोजन का उद्घाटन मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संयुक्त रूप से किया। दोनों नेताओं ने इस तरह के सांस्कृतिक आयोजनों को भारतीय परंपरा और इतिहास से जुड़ने का माध्यम बताया। कुल मिलाकर, यह महानाट्य न केवल मनोरंजन का साधन बना, बल्कि लोगों को अपने इतिहास पर गर्व करने का अवसर भी प्रदान किया।