रतलाम। जिले के आलोट, जावरा और पिपलोदा क्षेत्र के दो हजार से अधिक शिक्षक और कर्मचारी फरवरी माह का वेतन अब तक नहीं मिलने से चिंतित हैं। आम तौर पर वेतन हर माह की 1 से 5 तारीख के बीच जारी हो जाता है, लेकिन इस बार 16 मार्च तक भुगतान न होने से कर्मचारियों में असंतोष बढ़ गया है। मप्र शिक्षक संघ ने प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया है और चेतावनी दी है कि एक सप्ताह में वेतन न मिलने पर आंदोलन किया जाएगा।
वेतन में देरी के कारण
संघ के पदाधिकारियों के अनुसार, इस बार वेतन में देरी का मुख्य कारण प्रस्तावों का समय पर तैयार न होना और बजट की कमी है। कुछ आवश्यक मदों में धन समाप्त होने के कारण मूल वेतन जारी नहीं हो पाया। हालांकि मकान किराया भत्ता और अन्य भत्तों के लिए राशि उपलब्ध थी, लेकिन बेसिक सैलरी के अभाव से पूरी प्रक्रिया प्रभावित हुई। चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों से लेकर एलडीसी तक सभी इस देरी से प्रभावित हैं।
प्रशासन को दी गई जानकारी
वेतन प्रभारी ने इस समस्या की जानकारी उच्च अधिकारियों और संबंधित विभागों को पत्र के माध्यम से दी थी, ताकि समाधान निकाला जा सके। इसके बावजूद अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। शिक्षक संघ ने बताया कि वे पहले भी जिला शिक्षा अधिकारी और अन्य जिम्मेदार अधिकारियों को कई बार इस विषय में अवगत करा चुके हैं, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला, समाधान नहीं।
संघ ने दी आंदोलन की चेतावनी
कर्मचारियों का कहना है कि समय पर वेतन न मिलने से उनके दैनिक खर्च और पारिवारिक जिम्मेदारियां प्रभावित हो रही हैं। कई लोगों को आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। शिक्षक संघ ने स्पष्ट किया है कि अगर प्रशासन ने एक सप्ताह के भीतर भुगतान सुनिश्चित नहीं किया, तो जिला मुख्यालय और विकासखंड कार्यालयों के बाहर धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। अब सबकी नजर प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी है।










