प्रवीण तोगड़िया ने कहा मौजूदा दौर में हमें अपनी भूमिका पर गौर करने की जरूरत है। अगर बहनों-बेटियों को शुरुआत से ही धार्मिक और सामाजिक मूल्यों के प्रति जागरूक किया जाए तो लव जिहाद जैसी घटनाएं रोकी जा सकती हैं।

रतलाम। अंतरराष्ट्रीय हिंदू परिषद के अध्यक्ष प्रवीण तोगड़िया ने सोमवार को रतलाम प्रवास के दौरान विभिन्न सामाजिक और धार्मिक विषयों पर अपने विचार साझा किए। वे यहां सनातन धर्म सभा से जुड़े पदाधिकारियों से मुलाकात करने पहुंचे थे। उन्होंने परिवार और समाज की भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि बच्चों, खासकर बेटियों को बचपन से ही सही-गलत की समझ देना जरूरी है। ऐसा करने से लव जिहाद जैसे कुचक्रों पर कुश लगाया जा सकता है।

बचपन से जागरूकता पर जोर 
तोगड़िया का कहना था कि युवावस्था तक इंतजार करने के बजाय परिवारों को शुरुआती उम्र से ही बच्चों को मार्गदर्शन देना चाहिए। उनके मुताबिक, अगर बचपन से ही सही दिशा दी जाए तो आगे चलकर लव जिहाद जैसी सामाजिक समस्याओं से बचा जा सकता है। उन्होंने कहा कि परिवार की जिम्मेदारी है कि वे अपने बच्चों को सही निर्णय लेने के लिए तैयार करें। उन्होंने कुछ घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि समाज में ऐसे मामले सामने आ रहे हैं, जिनसे लोगों में चिंता बढ़ रही है।

सामाजिक घटनाओं पर जताई चिंता
उनका मानना है कि इन समस्याओं का समाधान केवल कानून से नहीं, बल्कि सामाजिक जागरूकता से संभव है। उन्होंने परिवार और समाज दोनों को मिलकर इस दिशा में काम करने की जरूरत बताई। तोगड़िया ने लोगों से अपील की कि वे अपने समुदाय के लोगों को प्राथमिकता दें। उन्होंने कहा व्यापार और सेवाओं के क्षेत्र में आपसी सहयोग बढ़ाने से समाज मजबूत हो सकता है। हालांकि, उनके इस बयान को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। 

कई देशों में हिंदुओं की स्थिति ठीक नहीं
एक सवाल पर उन्होंने कहा कि आज हिंदुओं की स्थिति बहुत ठीक नहीं है। पाकिस्तान, बांग्लादेश और यहां तक कि भारत में हिंदू बहुत बुरी स्थिति में है। इंग्लैंड, यूरोप, अफ्रिका में हिंदुओं की स्थिति ठीक है। हिंदु सुरक्षित नहीं है। जिहादी मानसिकता ने बड़ी परेशानी पैदा कर दी है। होली के दिन दिल्ली में रंग डालने के कारण हिंदू का बेटा मार दिया जाता है। यह स्थिति दुर्भाग्यपूर्ण है। ऐसी मानसिकता पर अंकुश लगाने के लिए पूरे समाज को आगे आना चाहिए।

सामाजित कार्यों पर अधिक जोर 
एक अन्य सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि वे चुनावी राजनीति में सक्रिय भूमिका नहीं निभाते। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में हर नागरिक को मतदान का अधिकार है और सभी को इसमें भाग लेना चाहिए। लेकिन उन्होंने खुद को चुनाव प्रचार से दूर बताते हुए कहा कि उनका ध्यान सामाजिक कार्यों पर अधिक रहता है। मध्य पूर्व में चल रहे संकट पर उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय संघर्षों का असर भारत पर भी पड़ सकता है।