इंदौर। ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच बढ़ते संघर्ष का असर अब भारत के औद्योगिक क्षेत्रों में साफ दिखाई देने लगा है। मध्य प्रदेश का प्रमुख औद्योगिक हब पीथमपुर इस वैश्विक संकट से बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। कच्चे माल की आपूर्ति बाधित होने और ऊर्जा संसाधनों की कमी ने उद्योगों की उत्पादन क्षमता को झटका दिया है। स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि कई फैक्ट्रियां उत्पादन घटाने या बंद करने को मजबूर हो रही हैं। इसका सीधा असर उनमें काम करने वाले हजारों मजदूरों पर पड़ा है। वे अब पलायन को मजबूर हो गए हैं।
उत्पादन और निर्यात गतिविधियां प्रभावित
पीथमपुर के उद्योगों में कच्चे माल की कमी हो गई है। इससे कीमतों में अचानक बढ़ोतरी हो गई है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शिपिंग और सप्लाई चेन में आई बाधाओं ने निर्यात को लगभग ठप कर दिया है। उद्योग संचालकों का कहना है कि लागत बढ़ने से उत्पादन जारी रखना मुश्किल हो गया है। कई इकाइयों ने शिफ्ट घटा दी हैं, जबकि कुछ ने अस्थायी रूप से ताले लगाने का निर्णय लिया है। इससे पूरे औद्योगिक माहौल में अनिश्चितता और चिंता का माहौल है।
मजदूरों पर सबसे ज्यादा पड़ रही मार
पीथमपुर में लगभग एक लाख मजदूर काम करते हैं। इस संकट का सबसे बड़ा असर अस्थायी और ठेका श्रमिकों पर पड़ा है। अनुमान के अनुसार, हजारों कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स को काम से हटाया जा चुका है। स्थायी कर्मचारियों की स्थिति भी बहुत सुरक्षित नहीं है, कई को आंशिक वेतन पर छुट्टी पर भेजा जा रहा है। मजदूरों के सामने रोजमर्रा के खर्च चलाना भी चुनौती बन गया है। महंगाई और बेरोजगारी ने उनके जीवन स्तर को गंभीर रूप से प्रभावित किया है।
ऊर्जा संकट-महंगाई ने बढ़ाई परेशानी
पीएनजी गैस की कमी और उसकी बढ़ती कीमतों ने उद्योगों के संचालन को और कठिन बना दिया है। मजदूरों के लिए भी घरेलू उपयोग की गैस महंगी हो गई है, जिससे उनका बजट बिगड़ रहा है। कई श्रमिकों को छोटे सिलेंडर खरीदने में भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ऊर्जा लागत बढ़ने से उद्योगों के लिए उत्पादन जारी रखना घाटे का सौदा बन गया है। यह स्थिति लंबे समय तक बनी रही तो औद्योगिक ढांचा चरमरा सकता है।
काम ठप होने से बेरोजगार हुए मजदूर
पीथमपुर औद्योगिक संगठन के अध्यक्ष डॉ. गौतम कोठारी ने कहा कि यहां से होने वाला निर्यात पूरी तरह ठप पड़ गया है। कच्चे माल के भाव आसमान छू रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय शिपिंग संकट के चलते उद्योग उत्पादन घटाना पड़ा है। इसका सीधा असर रोजगार पर पड़ा है। फैक्टरियों में शिफ्ट कम हो रही हैं। कई जगह शट-डाउन की स्थिति है। कई इकाइयों ने तो काम करना बंद कर दिया है। इस स्थिति का सबसे ज्यादा असर मजदूरों पर पड़ रहा है।
पीथमपुर में यह है रोजगार की स्थिति
पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र में कुल लगभग 1 लाख से अधिक मजदूर और कर्मचारी काम करते हैं। इनमें से 40% यानी करीब 40 हजार लोग कॉन्ट्रैक्ट (अस्थायी) मजदूर हैं। इन 40 हजार में से करीब 20 हजार मजदूरों की नौकरी जा चुकी है। बाकी 20 हजार मजदूर अनिश्चित स्थिति में हैं, यानी आज काम मिल रहा है तो कल मिलने की कोई गारंटी नहीं है। कुल कर्मचारियों में 60% यानी लगभग 60 हजार लोग स्थायी हैं। इनमें से भी करीब 50% कर्मचारियों को ले-ऑफ (अस्थायी छुट्टी) पर भेज दिया गया है। इनमें लगभग 30 हजार को आधी सैलरी पर रखा गया है।