भोपाल। मध्यप्रदेश में प्रॉपर्टी से जुड़े नियमों में करीब 10 साल बाद बड़ा बदलाव होने जा रहा है, जो सीधे आम लोगों की जेब पर असर डाल सकता है। राज्य सरकार लीज होल्ड जमीन को फ्रीहोल्ड करने की प्रक्रिया में संशोधन की तैयारी कर रही है, जिसके तहत नई फीस और शर्तें लागू हो सकती हैं।
प्रस्तावित बदलावों में आवासीय और व्यावसायिक संपत्तियों के लिए अलग-अलग शुल्क तय करने के साथ ही प्रीमियम, पेनाल्टी और कम्पाउंडिंग फीस बढ़ाने की योजना शामिल है। अगर यह प्रस्ताव कैबिनेट से मंजूर होता है, तो प्रॉपर्टी मालिकों के लिए फ्रीहोल्ड कराना पहले से महंगा हो जाएगा, हालांकि इसके बदले उन्हें स्थायी मालिकाना हक भी मिलेगा।
10 साल बाद नियमों में बड़ा बदलाव
सरकार करीब एक दशक बाद फ्रीहोल्ड से जुड़े नियमों में संशोधन करने जा रही है। प्रस्ताव के अनुसार अब आवासीय और व्यावसायिक संपत्तियों के लिए अलग-अलग शुल्क तय किया जाएगा। इस बदलाव से उन लोगों पर सीधा असर पड़ेगा, जो अपनी लीज जमीन को फ्रीहोल्ड कराना चाहते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे शहरी प्रॉपर्टी बाजार में नई हलचल आ सकती है। साथ ही सरकार को भी अतिरिक्त राजस्व मिलने की संभावना है। हालांकि आम नागरिकों के लिए यह प्रक्रिया महंगी साबित हो सकती है।
30 साल पुरानी लीज पर मिलेगा हक
नए प्रस्ताव में यह प्रावधान रखा गया है कि 30 साल या उससे अधिक अवधि की लीज पर ली गई जमीन को फ्रीहोल्ड किया जा सकेगा। इसका मतलब है कि संबंधित व्यक्ति को उस जमीन का पूर्ण मालिकाना हक मिल जाएगा। लेकिन इसके लिए पहले की तुलना में अधिक शुल्क देना होगा।
इसके अलावा लीज रिन्युअल के लिए प्रीमियम और किराए की नई दरें भी तय की जाएंगी। सरकार कम्पाउंडिंग फीस और पेनाल्टी में भी बढ़ोतरी करने की तैयारी में है। इससे नियमों का पालन सुनिश्चित करने की कोशिश की जा रही है।
कमर्शियल उपयोग के लिए खुलेंगे रास्ते
नए नियम उन लोगों के लिए अवसर लेकर आ सकते हैं जो लीज जमीन का व्यावसायिक उपयोग करना चाहते हैं। फ्रीहोल्ड होने के बाद जमीन का उपयोग अधिक स्वतंत्रता के साथ किया जा सकेगा। इससे छोटे और मध्यम कारोबारियों को फायदा मिल सकता है। हालांकि इसके लिए उन्हें बढ़ी हुई फीस का भुगतान करना होगा। सरकार का मानना है कि इससे शहरी विकास को गति मिलेगी। साथ ही निवेश को भी बढ़ावा मिलेगा।
लंबित मामलों के समाधान पर जोर
प्रदेश में वर्तमान में बड़ी संख्या में लीज रिन्युअल और फ्रीहोल्ड के मामले लंबित हैं। सरकार इन मामलों को तेजी से निपटाने के लिए नियमों में बदलाव कर रही है। सूत्रों के अनुसार शहरी क्षेत्रों में अधिकतर लीज जमीनें निजी उपयोग में हैं। उन्हें नियमित और व्यवस्थित करने के लिए यह कदम उठाया जा रहा है। इससे प्रशासनिक प्रक्रियाओं में भी पारदर्शिता आने की उम्मीद है। कुल मिलाकर, यह बदलाव प्रॉपर्टी सेक्टर में बड़ा प्रभाव डाल सकता है।
क्या होगा आम लोगों पर असर?
नए नियम लागू होने के बाद प्रॉपर्टी को फ्रीहोल्ड कराना महंगा हो जाएगा। इससे आम नागरिकों को अतिरिक्त आर्थिक बोझ उठाना पड़ सकता है। हालांकि मालिकाना हक मिलने से उन्हें दीर्घकालिक लाभ भी मिल सकता है। सरकार का उद्देश्य राजस्व बढ़ाने के साथ-साथ जमीनों को नियमित करना है। अब सबकी नजर कैबिनेट की मंजूरी और नियमों के अंतिम स्वरूप पर टिकी है। आने वाले समय में यह फैसला शहरी प्रॉपर्टी बाजार की दिशा तय करेगा।
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