मध्यप्रदेश में अब पुलिस किसी भी व्यक्ति को गिरफ्तार करने से पहले उसे लिखित रूप में कारण बताने के लिए बाध्य होगी। मध्यप्रदेश पुलिस मुख्यालय (PHQ) ने इस संबंध में सभी जिलों के लिए सख्त निर्देश जारी किए हैं।

भोपाल। मध्यप्रदेश में अब पुलिस किसी भी व्यक्ति को गिरफ्तार करने से पहले उसे लिखित रूप में कारण बताने के लिए बाध्य होगी। मध्यप्रदेश पुलिस मुख्यालय (PHQ) ने इस संबंध में सभी जिलों के लिए सख्त निर्देश जारी किए हैं।

निर्देशों के अनुसार, गिरफ्तारी से कम से कम दो घंटे पहले आरोपी को लिखित रूप में कारण बताना अनिवार्य होगा। नियमों का पालन नहीं करने वाले पुलिस अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला
PHQ द्वारा जारी सर्कुलर में भारत का सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court of India) के नवंबर 2025 के एक फैसले का हवाला दिया गया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 22(1) के तहत गिरफ्तारी के कारण जानना प्रत्येक नागरिक का मौलिक अधिकार है।

मौखिक जानकारी नहीं होगी मान्य
नए निर्देशों के मुताबिक, अब केवल मौखिक रूप से कारण बताना पर्याप्त नहीं होगा। पुलिस को ठोस कारण लिखित में देना होगा। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि गिरफ्तारी के कारण ऐसी भाषा में लिखे जाएं, जिसे आरोपी आसानी से समझ सके।

BNSS 2023 का भी उल्लेख
निर्देशों में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 (BNSS) की धारा 47 का भी उल्लेख किया गया है। इसके तहत गिरफ्तारी के आधार को लिखित रूप में देना और उसका रिकॉर्ड रखना अनिवार्य किया गया है।

नियम तोड़ने पर सख्त कार्रवाई
PHQ ने साफ किया है कि यदि इन दिशा-निर्देशों का पालन नहीं किया गया, तो गिरफ्तारी को अवैध माना जा सकता है। इसके अलावा संबंधित अधिकारी के खिलाफ न्यायालय की अवमानना या विभागीय कार्रवाई भी हो सकती है। आरोपी को ऐसी स्थिति में तत्काल रिहाई का अधिकार भी मिल सकता है।

सभी जिलों को दिए गए निर्देश
पुलिस मुख्यालय ने सभी पुलिस आयुक्तों, पुलिस अधीक्षकों और संबंधित इकाइयों को निर्देश दिए हैं कि वे इन नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित कराएं।श्चित किया जाएगा कि गिरफ्तारी के कारण ऐसी भाषा में लिखे जाएं, जिसे आरोपी आसानी से समझ सके।

BNSS 2023 का भी उल्लेख
निर्देशों में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 (BNSS) की धारा 47 का भी उल्लेख किया गया है। इसके तहत गिरफ्तारी के आधार को लिखित रूप में देना और उसका रिकॉर्ड रखना अनिवार्य किया गया है।

नियम तोड़ने पर सख्त कार्रवाई
PHQ ने साफ किया है कि यदि इन दिशा-निर्देशों का पालन नहीं किया गया, तो गिरफ्तारी को अवैध माना जा सकता है। इसके अलावा संबंधित अधिकारी के खिलाफ न्यायालय की अवमानना या विभागीय कार्रवाई भी हो सकती है। आरोपी को ऐसी स्थिति में तत्काल रिहाई का अधिकार भी मिल सकता है।

सभी जिलों को दिए गए निर्देश
पुलिस मुख्यालय ने सभी पुलिस आयुक्तों, पुलिस अधीक्षकों और संबंधित इकाइयों को निर्देश दिए हैं कि वे इन नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित कराएं।