भोपाल। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में साफ कर दिया है कि शराब का व्यापार मौलिक अधिकार की श्रेणी में नहीं आता। सोम डिस्टिलरीज की याचिका को खारिज करते हुए अदालत ने आबकारी विभाग की कार्रवाई को सही माना है। यह फैसला राज्य में शराब कारोबार के नियमों और नियंत्रण को लेकर अहम माना जा रहा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस क्षेत्र में काम करने वालों को कानून का पालन करना होगा। इस निर्णय से नियामक एजेंसियों को भी स्पष्ट दिशा मिली है।
लाइसेंस का निलंबन वैध कार्रवाई
सुनवाई के दौरान जस्टिस विवेक अग्रवाल की बेंच ने विस्तार से मामले पर विचार किया। कोर्ट ने कहा कि शराब से जुड़ा कारोबार पूरी तरह सरकारी नियंत्रण में होता है। ऐसे में नियमों का उल्लंघन होने पर लाइसेंस निलंबित या रद्द करना वैध कार्रवाई है। अदालत ने यह भी कहा कि प्रशासन के पास ऐसे मामलों में कार्रवाई करने का पूरा अधिकार है। यह फैसला कानून के सख्त पालन की जरूरत को रेखांकित करता है।
8 लाइसेंस सस्पेंड निलंबित किए
मामले की शुरुआत तब हुई जब 4 फरवरी 2026 को आबकारी आयुक्त ने कार्रवाई की। सोम डिस्टिलरीज प्रा. लिमिटेड और सोम डिस्टलरीज एंड ब्रेवरीज प्राइवेट लिमिटेड के 8 लाइसेंस निलंबित कर दिए गए। इस फैसले के पीछे फर्जी परमिट के जरिए शराब परिवहन के आरोप थे। यह कार्रवाई पहले जारी किए गए कारण बताओ नोटिस के आधार पर की गई थी। विभाग ने इसे गंभीर नियम उल्लंघन माना था।
कोर्ट में नहीं टिकीं कंपनी की दलीलें
कंपनी की ओर से कहा गया कि नोटिस पुरानी अवधि से संबंधित था। उनका तर्क था कि 31 मार्च 2024 के बाद नए लाइसेंस जारी हो चुके हैं। इसलिए पुराने मामलों के आधार पर नई कार्रवाई को गलत बताया गया। हालांकि अदालत ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने माना कि गंभीर मामलों में पुराने रिकॉर्ड भी मायने रखते हैं।
धोखाधड़ी साबित होने पर कार्रवाई सही
राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि एक्साइज कानून के तहत कार्रवाई उचित है। कोर्ट ने भी माना कि शो-कॉज नोटिस किसी एक समय तक सीमित नहीं होता। यदि गंभीर अनियमितताएं सामने आती हैं तो बाद में भी कार्रवाई की जा सकती है। अदालत ने कहा कि धोखाधड़ी साबित होने पर अन्य तर्क कमजोर पड़ जाते हैं। यह निर्णय प्रोपोर्शनैलिटी के सिद्धांत पर भी खरा उतरता है।
फैसले से अदालत ने दिया सख्त संदेश
फैसले के साथ ही हाईकोर्ट ने स्पष्ट संदेश दिया है कि शराब कारोबार में ढिलाई बर्दाश्त नहीं होगी। डिस्टिलिंग, ब्रूइंग और बॉटलिंग जैसी प्रक्रियाओं में नियमों का पालन जरूरी है। किसी भी प्रकार की गड़बड़ी मिलने पर व्यापक कार्रवाई की जा सकती है। यह फैसला भविष्य में ऐसे मामलों के लिए मिसाल के तौर पर देखा जाएगा। साथ ही यह भी स्पष्ट हो गया है कि इस कारोबार को मौलिक अधिकार का संरक्षण प्राप्त नहीं है।