जबलपुर। मध्यप्रदेश में सरकारी स्कूलों की खराब स्थिति को लेकर अब न्यायपालिका ने गंभीर चिंता जताई है। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की मुख्य पीठ ने इस मुद्दे पर सख्त रुख अपनाते हुए राज्य सरकार से पूरे प्रदेश के सरकारी स्कूलों की मौजूदा स्थिति की रिपोर्ट मांगी है। यह सुनवाई 5 मार्च को जबलपुर में हुई, जहां अदालत ने स्कूलों की स्थिति पर चिंता जताई। अदालत ने इस मामले को स्वतः संज्ञान में लेते हुए राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है और जवाब प्रस्तुत करने को कहा है। इस मामले की अगली सुनवाई 20 अप्रैल 2026 को होगी।
चीफ जस्टिस की अध्यक्षता में हुई सुनवाई
इस मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने की। कोर्ट ने राज्य सरकार से सवाल किया कि प्रदेश में संचालित सरकारी स्कूलों की वास्तविक स्थिति क्या है और वहां पढ़ने वाले बच्चों को किस तरह की सुविधाएं मिल रही हैं। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार को इस विषय पर पूरी जानकारी शपथ पत्र यानी हलफनामे के माध्यम से प्रस्तुत करनी होगी।
राज्य सरकार और शिक्षा विभाग को नोटिस
हाई कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई के दौरान मध्य प्रदेश सरकार और स्कूल शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव को औपचारिक नोटिस जारी कर दिया है। अदालत ने निर्देश दिया है कि सरकार अपने अधीन चलने वाले सभी सरकारी स्कूलों की स्थिति का विस्तृत विवरण पेश करे। हलफनामे में प्रदेश में स्कूल भवनों की स्थिति, उनमें उपलब्ध सुविधाएं और बुनियादी ढांचे से जुड़ी जानकारी शामिल करने को कहा गया है।
स्थानीय निकायों के स्कूलों की भी जानकारी दें
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया है कि रिपोर्ट केवल शिक्षा विभाग के स्कूलों तक सीमित नहीं होगी। इसमें उन स्कूलों की जानकारी भी शामिल करनी होगी जिन्हें स्थानीय निकाय संचालित करते हैं। इनमें नगर निगम, नगर पालिका और अन्य स्थानीय प्रशासनिक संस्थाओं के तहत चल रहे स्कूल भी शामिल हैं। हाई कोर्ट ने कहा है कि इन सभी स्कूलों की वर्तमान स्थिति का पूरा ब्यौरा हलफनामे में दिया जाए।
जबलपुर संभाग की रिपोर्ट से उठा मामला
दरअसल, वर्ष 2025 में जबलपुर संभाग के सरकारी स्कूलों की हालत को लेकर एक रिपोर्ट सामने आई थी। इस रिपोर्ट में कई स्कूल भवनों की खराब स्थिति और बुनियादी सुविधाओं की कमी की बात कही गई थी। इसी रिपोर्ट के आधार पर हाईकोर्ट ने मामले का स्वतः संज्ञान लिया था। हालांकि इस विषय पर सुनवाई लगभग सात महीने बाद हो पाई, लेकिन अब अदालत ने इसे पूरे प्रदेश के स्तर पर देखने का फैसला किया है।
छह सप्ताह में रिपोर्ट पेश करने का निर्देश
शिक्षा विभाग के जॉइंट डायरेक्टर कार्यालय को मिली जानकारी के अनुसार जबलपुर संभाग के आठ जिलों में कुल 15,639 सरकारी स्कूल संचालित हो रहे हैं। इनमें प्राथमिक, माध्यमिक, हाई स्कूल और हायर सेकेंडरी स्कूल शामिल हैं। इन स्कूलों का निरीक्षण किए जाने पर कई भवन जर्जर हालत में पाए गए थे, जिससे छात्रों की सुरक्षा और पढ़ाई दोनों पर असर पड़ सकता है। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को इस मामले में विस्तृत हलफनामा दाखिल करने के लिए छह सप्ताह का समय दिया है। रिपोर्ट में प्रदेश के हर जिले के सरकारी स्कूलों और स्थानीय निकायों द्वारा संचालित स्कूलों की स्थिति बतानी होगी।









