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Saurabh Bhardwaj Taunt on BJP: बिहार के सीएम नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के फैसला लेने के बाद AAP नेता सौरभ भारद्वाज ने भाजपा पर तंज कसा है, पढ़ें पूरी खबर...

Saurabh Bhardwaj Taunt on BJP: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आज 5 मार्च वीरवार को राज्यसभा के लिए नामांकन कर दिया है। बता दें कि करीब 10 बार नीतीश कुमार बिहार के सीएम रह चुके हैं। राज्यसभा में जाने के उनके फैसले के साथ ही बिहार के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने के कार्यकाल का समापन हो जाएगा। नीतीश कुमार के इस फैसले के बाद तमाम पार्टी के नेताओं की प्रतिक्रिया भी सामने आ रही हैं। वहीं आमा आदमी पार्टी के नेता सौरभ भारद्वाज ने नीतीश कुमार के फैसले को लेकर भाजपा पर तीखा हमला बोला है।  

पार्टी को दीमक की तरह खत्म किया-सौरभ भारद्वाज

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, AAP नेता सौरभ भारद्वाज ने कहा है कि,' बीजेपी जिसकी उंगली पकड़ती है उसी को दीमक की तरह खा जाती है। उन्होंने कहा कि ऐसा कोई सगा नहीं जिसको भाजपा ने ठगा नहीं। जिसकी उंगली पकड़ कर ये नए राज्य में घुसे, इन्होंने उसकी पार्टी को दीमक की तरह अंदर खत्म कर दिया।

BJP की राजनीतिक हमेशा से इसी तरह की रही है। पहले ये किसी राज्य में जाते हैं और वहां हाथ जोड़कर कहते हैं कि आप बड़े पार्टनर हैं और हम छोटे पार्टनर हैं किसी तरह से हमें ले लीजिए। और जैसी ही कोई क्षेत्रीय पार्टी इनकी एंट्री करवाती है तो धीरे-धीरे उसको खा जाते हैं।'


सौरभ भारद्वाज ने आगे कहा ‘हरियाणा में INLD, पंजाबी में अकाली दल, महाराष्ट्र में शिवसेना, ओडिशा में बीजू जनता दल और बिहार में जेडीयू को खा गए। बीजेपी हमेशा से क्षेत्रीय पार्टियों को खत्म करना चाहती है। नीतीश कुमार हो या TRS हो इन सभी पार्टियों की गलती ये है कि इन्होंने बीजेपी को कदम रखने के लिए अपने राज्य में छूट दी। इन्होंने बीजेपी की कम्युनल पॉलिटिक्स को बढ़ाया। और आज इनको ये भुगतना पड़ रहा है।’

पार्टी को खत्म करने की साजिश- तेजस्वी यादव

बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव ने भी इसे लेकर बयान दिया है। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि नीतीश कुमार और उनकी पार्टी JDU को भाजपा खत्म करने की साजिश कर रही है। उन्होंने आगे कहा कि BJP नहीं चाहती कि बिहार में ऐसा नेता रहे ओबीसी या दलितों की बात करता हो, वे केवल 'रबड़ स्टांप मुख्यमंत्री' चाहती है। राज्य में जो सत्ता का बदलाव हो रहा है, यह सब जनभावनाओं के खिलाफ है। 

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