MP हाई कोर्ट ने अदालतों की सुरक्षा पर जताई चिंता, सरकार से 31 मार्च तक रिपोर्ट मांगी। कई कोर्ट में बाउंड्री वॉल और सुरक्षा व्यवस्था नाकाफी।

मध्यप्रदेश। अदालतों की सुरक्षा व्यवस्था पर सरकार गंभीर क्यों नहीं? यह सवाल मध्यप्रदेश हाई कोर्ट (MP High Court) ने बुधवार को एक मामले की सुनवाई के दौरान किया है। बताया जा रहा है कि, अदालत ने मध्यप्रदेश सरकार को मामले पर विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है। इस तरह राज्य सरकार को 31 मार्च तक रिपोर्ट अदालत में पेश करनी होगी।

जानकारी के अनुसार अदालतों की सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े केस पर बुधवार को सुनवाई हुई। चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिविजनल बेंच ने मामले को सुना और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सख्त टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि, कहीं कोर्ट परिसर की दीवार गिरने से जज घायल हो रहे है। कहीं परिसर में बम फूट रहा है। सरकार इस मुद्दे पर गंभीर क्यों नहीं है।

एमपी की अदालतों के हाल
हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार नरेश एम सिंह की रिपोर्ट में बताया गया है कि, मध्यप्रदेश के 29 डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ऐसे हैं जहां चहारदीवारी ही नहीं है। 27 तहसील न्यायालयों में बॉउंड्री वॉल की ऊंचाई बहुत कम है। सबसे चौंकाने वाली बात तो यह है कि, केवल पांच जिला अदालत परिसर ऐसे हैं जहां पुलिस चौकी की व्यवस्था है।

सरकार ने दी सफाई
इसी रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि, 28 जिलों में जज और उनके परिवार असुरक्षित हैं। उनके लिए की गई सुरक्षा व्यवस्था काफी नहीं है। ऐसे में इनकी जान को खतरा हो सकता है। हालांकि सरकर का कहना है कि, जिन कोर्ट परिसरों में दीवार नहीं थी वहां दीवार बनाई गई और जहां बॉउंड्री वॉल की ऊंचाई कम थी वहां ऊंचाई बढ़ा दी गई है। 

2016 से चल रहा है मामला
गौरतलब है कि, अदालत की सुरक्षा से जुड़े मामले में हाई कोर्ट ने साल 2016 में स्वतः संज्ञान लिया था। दस साल बाद भी इस मामले में सुनवाई जारी है। अदालत के आदेश पर सरकार 31 मार्च तक रिपोर्ट पेश करेगी इसके बाद देखना होग कि, हाई कोर्ट आगे क्या आदेश देता है।