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मध्यप्रदेश में 1 मई से डिजिटल जनगणना की शुरुआत होने जा रही है। इस बार जनगणना पूरी तरह ऑनलाइन और मोबाइल ऐप आधारित होगी। सबसे पहले मकानों की जानकारी जुटाई जाएगी, इसके बाद परिवारों का विवरण और अंत में हर व्यक्ति से जुड़ी व्यक्तिगत जानकारी दर्ज की जाएगी। जनगणना की यह पूरी प्रक्रिया तीन चरणों में पूरी होगी और फरवरी तक इसका काम समाप्त कर लिया जाएगा।
सरकार का उद्देश्य इस बार जनगणना को अधिक पारदर्शी, तेज और त्रुटि-रहित बनाना है। इसी वजह से पेपरलेस सिस्टम अपनाया जा रहा है, जिससे डेटा सीधे रियल-टाइम में पोर्टल पर अपलोड होगा।
भोपाल में डिप्टी कलेक्टर को सौंपी गई जिम्मेदारी
भोपाल जिले में जनगणना की पूरी जिम्मेदारी डिप्टी कलेक्टर भुवन गुप्ता को सौंपी गई है। जनगणना के दौरान हर 1000 की आबादी पर एक प्रगणक तैनात किया जाएगा। ये प्रगणक घर-घर जाकर लोगों से जरूरी जानकारी जुटाएंगे।
1 मई से प्रगणक सबसे पहले मकान से जुड़ी जानकारी दर्ज करेंगे, जैसे मकान का प्रकार, उपयोग और अन्य बुनियादी विवरण। इसके बाद अगले चरणों में परिवार और व्यक्तियों से जुड़ा डेटा एकत्र किया जाएगा।
मोबाइल ऐप से होगी पूरी गिनती, जाति का डेटा भी होगा शामिल
इस बार की जनगणना की सबसे खास बात यह है कि पूरी प्रक्रिया डिजिटल होगी। प्रगणक मोबाइल ऐप के जरिए सभी जानकारियां दर्ज करेंगे। इससे डेटा सीधे सिस्टम में सेव होगा और किसी तरह की मैनुअल एंट्री की जरूरत नहीं पड़ेगी।
डिजिटल जनगणना के तहत जाति से जुड़ा डेटा भी इसी प्रक्रिया में लिया जाएगा। सरकार का मानना है कि डिजिटल सिस्टम से न केवल समय बचेगा, बल्कि आंकड़ों की सटीकता भी बेहतर होगी।
